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भाजयुमो की ‘अध्यक्षी’ पर रार: निष्पक्ष चयन या ‘मयूर’ के सिर सजेगा मुकुट ? भाजपा कार्यालय निर्माण में घोटाले के आरोपों से गरमाई सियासत

भिंड। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिलाध्यक्ष पद को लेकर जिले के सियासी गलियारों में सरगर्मी चरम पर है। पिछले महीने भोपाल में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के बंगले पर हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद से ही जिले की राजनीति में अंदरूनी खींचतान और कानाफूसी का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां शीर्ष पद के लिए जोड़-तोड़ जारी है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा कार्यालय निर्माण में बड़े भूमि घोटाले और वित्तीय लेन-देन के गंभीर आरोपों ने पार्टी के भीतर हड़कंप मचा दिया है।

कोर कमेटी की बैठक में सामने आए मतभेद

सूत्रों के मुताबिक, भोपाल में आयोजित कोर कमेटी की उच्च स्तरीय बैठक में भिंड के स्थानीय क्षत्रपों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। बैठक में स्थानीय विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और मंत्री राकेश शुक्ला ने भाजयुमो जिलाध्यक्ष पद के लिए अपनी ओर से कुछ नाम सुझाए थे। लेकिन, चर्चाओं का बाजार तब गर्म हो गया जब भाजपा के जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नरवरिया ने ‘मयूर भदौरिया’ के नाम पर सबसे ज्यादा जोर दिया। मयूर के नाम की इस पैरवी के बाद से ही जिले के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच विरोध और असंतोष के स्वर मुखर होने लगे हैं।

15 हजार वर्गफुट जमीन गायब : क्या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा भाजपा कार्यालय ?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ भाजपा के नए जिला कार्यालय निर्माण को लेकर आया है। बताया जा रहा है कि कार्यालय के लिए रिकॉर्ड में 60 हजार वर्गफुट क्षेत्रफल की जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर केवल 45 हजार वर्गफुट जमीन पर ही निर्माण कार्य चल रहा है।

बड़ा सवाल: आखिर बाकी की 15 हजार वर्गफुट जमीन कहां गई ?

कोर कमेटी की बैठक के दौरान खुद विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने इस विसंगति का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया था। सूत्रों का दावा है कि कार्यालय के लिए आवंटित जमीन का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। गौरतलब है कि इस निर्माण कार्य को सुचारू रूप से कराने की जिम्मेदारी जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नरवरिया को सौंपी गई थी, जिन्होंने कथित तौर पर इस काम की देखरेख अपने चहेते मयूर भदौरिया को सौंप दी ! हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो/वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें दो अज्ञात लोग इसी जमीन गड़बड़ी को लेकर चर्चा करते सुनाई दे रहे हैं।

लग्जरी कारें और 10 लाख का कैश: क्या ‘एहसान’ के बदले मिलेगा पद ?

​मयूर भदौरिया के नाम का जिले में प्रबल विरोध हो रहा है। इस विरोध के बीच राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तैर रही हैं। आरोप हैं कि जिला अध्यक्ष नरवरिया जिन लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से कई गाड़ियां मयूर भदौरिया द्वारा ही उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, राजनीतिक गलियारों में 10 लाख रुपये के नगद लेन-देन की बात भी दबी जुबान से चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चाओं की मानें तो इसी ‘विशेष सहयोग’ के बदले जिला अध्यक्ष, मयूर को भाजयुमो की कमान सौंपने की जुगत में लगे हैं।

अब क्या होगा कोर कमेटी का अगला कदम?

युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद के लिए दावेदारों के नाम भाजपा कोर कमेटी के समक्ष भेजे जा चुके हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या संगठन इन गंभीर आरोपों और आंतरिक विरोध को देखते हुए पैनल में आये निष्पक्ष नामों को शामिल करता है, या फिर विवादों के साए के बीच ‘मयूर’ के सिर मुकुट सजेगा। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता अब शीर्ष नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

Anshul Mittal

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