अवैध होर्डिंगों पर लाखों रुपए जुर्माना बकाया, वसूलना भूले या भूलने का ड्रामा कर रहे निगम अफसर ?
स्ट्रक्चर गिरने के बाद अफसरों को याद आया कि होर्डिंग अवैध था, PIN की खबर के बाद जुर्माने के नोटिस जारी हुए लेकिन जुर्माने की रकम आज तक नहीं वसूली गई ।

अंशुल मित्तल /ग्वालियर । नगर निगम की होर्डिंग शाखा के संरक्षण में लगा एक अवैध होर्डिंग स्ट्रक्चर मामूली सी आंधी में भरभराकर गिर पड़ता है। निगम के जिम्मेदार अफसर दो होर्डिंगों की मंजूरी निरस्त करते हैं और अपने आदेश में यह मानते हैं कि यह दोनों होर्डिंग निर्धारित क्षेत्रफल से काफी बड़े साइज के थे। PIN की खबर से खुलासा होता है कि निगम द्वारा “मंजूरी निरस्ती” की कार्रवाई दिखावा मात्र थी। इसके बाद निगम द्वारा संबंधित होर्डिंग स्ट्रक्चरों के विरुद्ध 13 लाख रुपए जुर्माने के नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। लेकिन यह कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहती है। क्योंकि वह 13 लाख रुपए निगम खाते में जमा नहीं कराए जाते ।
समझें पूरा मामला
12-13 जून की दरमियानी रात मामूली सी आंधी में मोती महल, LIC ऑफिस के सामने लगा विशाल होर्डिंग स्ट्रक्चर भरभराकर गिर गया था। घटना के बाद निगम द्वारा जारी पत्र से स्पष्ट हुआ कि घटनास्थल पर धराशाई हुए होर्डिंग सहित एक अन्य होर्डिंग स्ट्रक्चर भी स्वीकृत साइज से काफी बड़े साइज का बनाया गया था… और अंततः दोनों स्ट्रक्चर की (OMD क्रमांक 727, 728) मंजूरी निरस्त करते हुए कार्रवाई से इतिश्री कर ली गई।
PIN ने खोली थी कार्रवाई की पोल, फिर जारी हुए 13 लाख के नोटिस
14 जून को प्रकाशित खबर में PIN ने निगम की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए सवाल उठाया था कि “जब निगम मानता है कि होर्डिंग स्ट्रक्चर स्वीकृत साइज से बड़े थे, फिर जुर्माना क्यों नहीं ?” इसके बाद निगम ने 16 जून को दोनों होर्डिंग स्ट्रक्चरों के विरुद्ध 13 लाख 4 हजार रुपए के जुर्माना नोटिस जारी किए। इस जुर्माने की रकम को 7 दिन में निगम खाते में जमा कराया जाना था। जो कि आज तक नहीं कराया गया।
लाखों रुपए की वसूली भूले या भूलने का ड्रामा कर रहे अफसर ?
दावा किया जाता है कि प्रॉपर्टी टैक्स और जुर्मानों से मिलने वाला पैसा निगम के रेवेन्यू को बढ़ाता है और यह रकम विकास कार्यों में खर्च की जाती है। इसी दावे के तहत आम नागरिकों से संपत्तिकर की पाई-पाई वसूल करने की जुगत लगाई जाती है। फिर यह कैसे मुमकिन है कि होर्डिंग वाले, कद्दावर अफसर जुर्माने के 13 लाख रुपए वसूल करना भूल गए हों ?
57 लाख रुपए का भी इंतजार कर रहा निगम खजाना…!
लाखों रुपए जुर्माने के नोटिस जारी होने के बाद, निगम खाते में पैसा जमा न होने का कार्यक्रम नया नहीं है। केवल इस खबर में वर्णित मामले की ही बात करें तो जिस जगह पर यह दोनों होर्डिंग स्ट्रक्चर खड़े थे, उसी जगह पर पहले लगे विज्ञापनो के विरुद्ध भी होर्डिंग शाखा द्वारा तकरीबन 57 लाख रुपए की वसूली निकालते हुए नोटिस जारी किए गए थे। वह 57 लाख रुपए भी आज तक निगम खाते में जमा नहीं हुए।
इसके अलावा 18 करोड़ के नोटिसों की भी खासी चर्चा विभाग में सुनाई देती है। चर्चाओं की माने तो इस तरह के जुर्माना नोटिसों को दबाने के लिए 10 से 25% तक का रेट, जुर्माने की रकम के हिसाब से सेट है !
अपर कमिश्नर निरूत्तर
खबर में वर्णित मामले पर निगम का पक्ष जानने अपर आयुक्त प्रतीक राव को कॉल करने पर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ एवं व्हाट्सएप मैसेज का भी अपरायुक्त ने कोई रिप्लाई नहीं किया।

बहरहाल PIN पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। देखना यह है कि जुर्माने की रकम निगम खाते में जमा होकर जनता के काम आती है या… सामने आती है परसेंटेज वाली चर्चाओं की सच्चाई… !




