प्रॉपर्टी टैक्स की रकम से ब्याज कमा रहे टीसी ? महीनों बाद जमा हुए 25 लाख रुपए। निगमकर्मी कर रहे सूदखोरी का साइड बिजनेस ?
कानून की धज्जियां उड़ाकर सरकारी खजाने को बनाया बंधक, सहकर्मियों के दबाव के बाद उगली रकम। वार्ड 66 में भी बड़ा खेल: लाखों के चेक बाउंस होने के बाद भी बांटी गई 'क्लीन चिट'

ग्वालियर नगर-निगम। यहां भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध चरम सीमा पार करते नजर आ रहे हैं । ताजा जानकारी के अनुसार निगम के एक टीसी ने जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई को सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय महीनों तक दबाए रखा। यह सीधे तौर पर एक गंभीर वित्तीय अपराध है। इसके साथ सवाल पैदा हो रहे हैं कि “नगर निगम के टैक्स वसूली करने वाले कर्मचारियों ने ब्याज पर रकम चलाने का नया धंधा खोल लिया है क्या ? “
3 महीने तक दबाकर रखे ₹25 लाख, कार्यवाही शून्य !
अंकित शर्मा ने वार्ड 25 में करसंग्रहक रहते हुए ₹24,69,000 की भारी-भरकम टैक्स राशि गैर-कानूनी तरीके से अपने पास रोके रखी। बताया जा रहा है कि उन्होंने जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक यह रकम निगम खाते में जमा नहीं की ! बड़ा सवाल यह है कि क्या इस सरकारी रकम को निजी तौर पर बाजार में चलाकर ब्याज कमाया जा रहा था? जब मुख्यालय के कर्मियों ने दबाव बनाया, तब जाकर 6 अप्रैल 2026 को यह रकम जमा की गई। सबसे बड़ी बात अंकित शर्मा पर अफसरों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
क्या कहता है नियम :
- वित्तीय नियमों का उल्लंघन : केंद्रीय एवं राज्यीय वित्तीय नियमों (Receipts and Payments Rules) के अनुसार, सरकारी सेवक को प्राप्त किसी भी राजस्व या देय राशि को बिना किसी देरी के सीधे सरकारी खाते में जमा करना अनिवार्य है।
- विभागीय कार्रवाई (Disciplinary Action): दोषी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। इसके तहत उसे निलंबित किया जा सकता है और जांच सिद्ध होने पर सेवा से निष्कासित (Dismissal) या पदच्युत (Removal) किया जा सकता है।
- गबन का आरोप : सरकारी धन का उपयोग अपने पास रखने या निजी हित में करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) या नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गबन और आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा दर्ज होता है।
बड़ा खेल – चेक बाउंसिंग छुपाकर, बांटी “क्लीन चिट”
सूत्र बताते हैं कि अंकित शर्मा और इनके सहयोगियों का कारनामा यहीं खत्म नहीं होता। इससे पहले वार्ड 66 में टीसी रहते हुए संपत्तिकर के तकरीबन ₹6 लाख के चेक बाउंस हो गए थे ! नियमों के तहत इन डिफाल्टरों पर सख्ती से वसूली की कार्रवाई करने के बजाय, टीसी और उनके सहयोगियों ने उन्हें चुपचाप ‘क्लीन चिट’ थमा दी। यह सीधे तौर पर पद का दुरुपयोग कर राजस्व को चपत लगाने का मामला है।
प्रशासनिक संरक्षण : कार्रवाई के बजाय ‘राजस्व विभाग’ में पोस्टिंग, दाग धोने की कोशिश ?
इस पूरे महाघोटाले में सबसे चौंकाने वाला और संदेहास्पद मोड़ तब आया, जब इतने गंभीर आरोपों के बाद भी आरोपी अंकित शर्मा पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। निलंबन या एफआईआर दर्ज करने के बजाय, विभागीय प्रक्रिया की आड़ लेकर उन्हें चुपचाप ‘राजस्व विभाग’ में भेज दिया गया है।
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