मौत पर लीपापोती ! गुड़ा-गुड़ी नाका हादसा मामले में शासन ने कसी नकेल, उच्च स्तरीय जांच के आदेश
सवालों के घेरे में एड. कमिश्नर की कार्रवाई: क्या घटिया निर्माण के असली गुनाहगारों को साजिश के तहत बचाया गया ? अब नए अफसरों के हाथ होगा दूध का दूध, पानी का पानी। खबर है कि मामले की शिकायत लोकायुक्त तक भी पहुंचाई गई है।

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। गुड़ा-गुड़ी नाके पर हुआ रिटेनिंग वॉल हादसा, मामले में शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नगरीय प्रशासन, भोपाल द्वारा उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी करते हुए टीम का गठन कर दिया गया है।
गौरतलब है कि वार्ड 55 में नगर निगम द्वारा बनाई जा रही रिटेनिंग वॉल 19 जुलाई को भरभराकर गिर गई थी। निगम की लापरवाही से हुई इस घटना में कई लोग घायल हुए थे, साथ इस दीवार के नीचे दबकर, एक महिला की मौत हो गई थी। मामले में निगम ने लीपापोती करते हुए चुनिंदा अफसरों को सेफ किया और खुद की जांच को जांच को रफा-दफा कर दिया था !
एड. कमिश्नर ने चुनिंदा अफसरों पर दिखाई मेहरबानी
घटिया निर्माण का जिम्मेदार ठहराते हुए एड . कमिश्नर मुनीष सिकरवार ने कई अफसरों पर कार्रवाई की थी। लेकिन तथ्यों की माने तो इनके द्वारा की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में है। क्योंकि मुनीष सिकरवार ने घटिया दीवार निर्माण में, कार्यपालन यंत्री रहे, सुशील कटारे को, सिर्फ “कारण बताओ नोटिस” जारी करते हुए रियायत दी। इसके अलावा तत्कालीन ZO (विनियमित कंप्यूटर ऑपरेटर) अनिल श्रीवास्तव को जनकार्य विभाग में अटैच किया गया। जबकि सहायक यंत्री राकेश कुशवाह, सहायक यंत्री सौरभ शाक्य और उपयंत्री बृजेश राजपूत को निलंबित किया गया।
एक जैसी लापरवाही पर दोहरी नीति से कार्रवाई , पक्षपात या सेटिंग ?
कमिश्नर द्वारा गठित टीम की जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि इंजीनियर राकेश कुशवाह, बृजेश राजपूत और ZO अनिल श्रीवास्तव ने समय रहते रिटेनिंग वॉल, निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण नहीं किया था। लेकिन अपर कमिश्नर मुनीष सिकरवार ने दो इंजीनियरों को सस्पेंड किया जबकि ZO अनिल श्रीवास्तव (मूल पद – विनियमित कंप्यूटर ऑपरेटर) को जनकार्य में अटैच किया गया।
भोपाल स्तर से हस्तक्षेप, 07 दिन में रिपोर्ट तलब
संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी आदेश (दिनांक 30.07.2026) के तहत मामले की गुणवत्ता की नए सिरे से जांच के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया है।
जांच टीम में शामिल अधिकारियों के नाम :
- अमरसत्य गुप्ता, संभागीय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ग्वालियर-चंबल संभाग।
- हरीश बाबू शाक्यवार, कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ग्वालियर-चंबल संभाग।
- अभिषेक सिंह भदौरिया, कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ग्वालियर-चंबल संभाग।
- राजीव पाण्डेय, सहाय यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ग्वालियर-चंबल संभाग।
निगमायुक्त से माँगा गया प्रतिवेदन
संचालक कार्यालय द्वारा 03 अगस्त को पत्र जारी कर, निगम आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि, हादसे से संबंधित सभी दस्तावेज, प्रकरण की वस्तुस्थिति, और अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
घटिया निर्माण के कारण हुआ हादसा, जांच के बाद होगी जिम्मेदारों की नपाई ?
शासन स्तर से इस मामले में दोबारा उच्च स्तरीय जांच बिठाए जाने से यह माना जा रहा है कि शासन निगम द्वारा की गई जांच से संतुष्ट नहीं है। साथ ही अब निगम के उन इंजीनियरों की मुश्किलें बढ़ना तय है, जिन पर निगम ने मेहरबानी दिखाई थी ! अब इनको कार्यवाही से बचाने वाले अपर आयुक्त मुनीष सिकरवार से भी जवाब तलब हो सकता है ! खबर यह भी है कि इस मामले में लोकायुक्त को भी शिकायत की जा चुकी है और जल्द ही मामले में लोकायुक्त की एंट्री भी हो सकती है !
Author – Anshul Mittal, Gwalior, 8770226566




