होर्डिंग का 70 लाख सहित करोड़ों अधर में, सेटिंग नहीं तो वसूली के नाम पर लीपा-पोती क्यों कर रहे शाखा के कद्दावर अफसर ?
भरभराकर गिरा था अवैध होर्डिंग, विज्ञापन शाखा ने की थी मामला दबाने वाली कार्रवाई, PIN की खबर के बाद जारी हुआ था जुर्माने का नोटिस

@अंशुल मित्तल
ग्वालियर / नगर निगम की होर्डिंग शाखा के जिम्मेदारों के बारे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ये साहिबान, विज्ञापन माफिया पर कार्रवाई के नाम पर लगातार वरिष्ठ अफसरों को गुमराह करते हैं और निगम की आय बढ़ाने के नाम पर अपनी आय बढ़ाने के काम में जुटे हुए हैं ! क्योंकि इनके द्वारा दी गई खुली छूट के चलते, निगम का बेहिसाब राजस्व, लंबे अरसे से अधर में लटका है !
13 लाख +12% ब्याज की वसूली अब तक क्यों नहीं ?
मोतीमहल क्षेत्र में LIC ऑफिस के सामने स्वीकृत साइज से अधिक (अवैध) दो होर्डिंग OMD क्रमांक 727, 728 के विरुद्ध 13 लाख से अधिक का जुर्माना नोटिस 16 मई 2026 को जारी किया गया था। निगम द्वारा जारी नोटिस के अनुसार यह जुर्माना राशि 7 दिन में निगम खाते में जमा हो जानी चाहिए थी, समयसीमा के बाद 12% ब्याज के साथ रकम की वसूली की जानी थी। विभाग के नोडल अनूप लिटोरिया और OS शिवहरी शर्मा आज तक इस रकम की वसूली नहीं कर सके हैं। या कहें कि जानबूझकर यह वसूली नहीं की गई !
भरभराकर गिरा विशाल होर्डिंग, विभाग ने की लीपापोती। “PIN” की खबर से खुला था खेल…
13 मई 2026 को मोतीमहल क्षेत्र में लगा होर्डिंग अचानक भरभराकर गिर पड़ा था। इसके बाद होर्डिंग शाखा के अफसरों ने इस होर्डिंग स्ट्रक्चर सहित पास में लगे एक और स्ट्रक्चर को स्वीकृत साइज से अधिक (अवैध) माना। कार्रवाई के तौर पर बिना किसी जुर्माने के, दोनों की OMD निरस्त करते हुए, मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई थी। लेकिन Public Interest News ने विज्ञापन के अफसरों की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए जिससे निगम को बड़ा लाभ होने की उम्मीद बनी !
PIN ने लिखा था कि “निगम को मिलेंगे कम से कम 10 लाख…”, तब जारी हुए जुर्माना नोटिस
13 मई को विशालकाय होर्डिंग गिरने बाद निगम द्वारा की गई कार्रवाई पर PIN ने खबर के माध्यम से, कड़े सवालों के साथ, यह प्रमुख सवाल उठाया था कि “स्वीकृत साइज से बड़े बनाए गए होर्डिंग स्ट्रक्चर, जब लंबे समय से वहां खड़े हैं, तो विज्ञापन शाखा के नोडल ने इतने लंबे समय से क्या मॉनिटरिंग की और जुर्माना क्यों नहीं लगाया ?” PIN ने अपनी खबर में ₹10 लाख रुपए का अनुमानित आंकड़ा लिखा था। तब जाकर विभाग ने ₹13 लाख रुपए के नोटिस जारी किए थे।

₹57 लाख पुराने बकाया। 12% ब्याज क्या, मूल भी नहीं वसूल सके नोडल और OS !
मोतीमहल क्षेत्र में एलआईसी ऑफिस के सामने जिस स्थान पर OMD क्रमांक 727, 728 के जरिए होर्डिंग लगाने की परमिशन जारी की गई थी। इसी स्थान पर पहले किसी अन्य को होर्डिंग स्ट्रक्चर पर विज्ञापन लगाने की मंजूरी दी गई थी। बताया जा रहा है कि पुराने होर्डिंग संचालक पर निगम का 57 लाख रुपया बकाया था। नोटिस जारी किए गए लेकिन हमेशा की तरह होर्डिंग शाखा के कद्दावर अफसर वे 57 लाख भी वसूल नहीं कर पाए और उसी स्थान पर विजय फाल्के के नाम से होर्डिंग संचालन की मंजूरी जारी कर दी गई।
18 करोड़ के नोटिसों की जांच हो तो कईयों की “खुलेगी कलई “
विज्ञापन शाखा के अफसरों की जोड़ी ने शहर में कई बड़े होर्डिंग और विज्ञापनों को अवैध बताते हुए 18 करोड रुपए से अधिक के नोटिस जारी किए थे। मीडिया के जरिए मामला खुलते देख सीनियर्स को झांसा दिया गया कि “इससे निगम की आय बढ़ेगी…” ! लेकिन वह 18 करोड़ रुपए की वसूली आज तक नहीं हो सकी । इसमें से कितना पैसा निगम खाते में जमा हुआ और कितना पर्सनल खातों में… यह जांच का विषय है !
सवाल- जो हर बार पूछे जाएंगे
- होर्डिंग गिरने के बाद सिर्फ OMD निरस्ती का ड्रामा क्यों किया गया था ?
- जब स्वीकृत साइज से अधिक के दो होर्डिंग, मुख्य मार्ग पर 1 साल से लगे थे, क्या सो रहे थे निगम के जिम्मेदार ?
- ₹13 लाख रुपए मय ब्याज की वसूली आज तक किसकी शह पर नहीं हुई..?
- क्या पुराने ₹57 लाख रुपए निगम को भूलना पड़ेंगे ?
- ₹18 करोड़ के नोटिसों के बाद कितने निगम को मिले… ?
कुल मिलाकर केवल मोतीमहल क्षेत्र के ही मामले में, पुराने 57 लाख और 16 मई के 13 लाख को देखें तो, निगम के 70 लाख रुपए की बड़ी रकम 12% के साथ अधर में लटकी है । होर्डिंग शाखा के अफसरों के वसूली रिकॉर्ड और काम की परपाटी को देखते हुए, संशय है कि यह बड़ी रकम, निगम खाते में जमा हो भी सकेगी या नहीं…?
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