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“PIN खबर इंपैक्ट” स्ट्रक्चरल इंजीनियर को नोटिस। कार्रवाई से सामने आया 10 लाख का घाटा

नगर निगम ने अपने नोटिस में माना कि दोनों होर्डिंग "स्वीकृत साइज" से बड़े थे। सवाल- क्या यह विभाग की "मॉनिटरिंग" का फेलियर नहीं ?

ग्वालियर / मोती महल और एलआईसी (LIC) ऑफिस के पास बीते दिनों हुए दर्दनाक होर्डिंग हादसे के बाद आखिरकार नगर निगम प्रशासन की नींद टूट गई है। खोजी पत्रकारिता की मिसाल पेश करते हुए ‘PIN खबर’ ने इस पूरे मामले में छिपी गंभीर खामियों और विभागीय लापरवाही को प्रमुखता से उजागर किया था। खबर का बड़ा असर यह हुआ है कि निगम ने गिरे हुए होर्डिंग स्ट्रक्चर के साथ-साथ पास में ही लगे एक अन्य होर्डिंग की अनुमति को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इसके अलावा, होर्डिंग की मजबूती का ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ जारी करने वाले स्ट्रक्चरल इंजीनियर हिमांशु निगम  को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

हालांकि, इस पूरी कार्रवाई ने नगर निगम की मॉनिटरिंग व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वीकृति से बड़े थे होर्डिंग; निगम ने खुद माना

नगर निगम ने अपने आधिकारिक नोटिस में यह स्वीकार कर लिया है कि घटना स्थल पर लगे दोनों होर्डिंग “स्वीकृत साइज” से काफी बड़े थे। रिकॉर्ड के अनुसार, OMD (होर्डिंग स्ट्रक्चर मंजूरी) क्रमांक 727 और 728 के तहत इन होर्डिंग्स को केवल 1200 वर्गफुट की मंजूरी दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह थी कि मौके पर पिछले एक साल से 1600 वर्गफुट के विशालकाय और भारी-भरकम स्ट्रक्चर सीना ताने खड़े थे।

बड़ा सवाल: जब यह अवैध निर्माण पिछले एक साल से शहर के बीचों-बीच लगा हुआ था, तब नगर निगम की होर्डिंग शाखा और मॉनिटरिंग टीम क्या कर रही थी? क्या यह सीधे तौर पर विभाग का ‘मॉनिटरिंग फेलियर’ नहीं है ?

कार्रवाई के नाम पर लीपापोती, निगम को 10 लाख का फटका

​होर्डिंग गिरने के बाद जिम्मेदारों का एक ऐसा घपला सामने आया है जिससे नगर निगम के खजाने को सीधे तौर पर तकरीबन 10 लाख रुपए की चपत लगी है।

  • राजस्व का नुकसान : एक प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, स्वीकृत साइज से अधिक (अवैध 400 वर्गफुट अतिरिक्त) बनाए गए इन दोनों स्ट्रक्चरों पर यदि नियमानुसार समय रहते जुर्माना लगाया जाता, तो निगम को कम से कम 10 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता।
  • जांच का विषय : जब नगर निगम खुद मान रहा है कि होर्डिंग तय आकार से बड़े थे, तो क्यों पहले ही संबंधित फर्म पर जुर्माना नहीं ठोका गया ? शहर में यह चर्चा आम है कि होर्डिंग शाखा के जिम्मेदार अधिकारी कुछ चुनिंदा रसूखदार फर्मों पर मेहरबान रहते हैं और उन पर कार्रवाई करने से लगातार बचते हैं।
  • स्ट्रक्चरल इंजीनियर की भूमिका :  स्ट्रक्चरल इंजीनियर हिमांशु निगम पर कार्रवाई की बात करें तो यह भी साफ है कि हिमांशु निगम ने केवल 1200 वर्गफीट का साइज मानते हुए मजबूती का सर्टिफिकेट दिया था। जबकि मौके पर 1600 वर्ग फुट के स्ट्रक्चर खड़े किए गए। हालांकि देखना यह है कि स्ट्रक्चरल इंजीनियर हिमांशु निगम निगम के नोटिस के जवाब में क्या लिखते हैं…!

​खानापूर्ति के आदेश; जनता की जान से खिलवाड़

नगर निगम की कार्यशैली का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। निगम ने 7 मई 2026 को एक आदेश जारी कर सभी OMD धारकों से 7 दिनों के भीतर होर्डिंग स्ट्रक्चरों की “सुरक्षा रिपोर्ट” मांगी थी। लेकिन स्थानीय जानकारों और शहरवासियों का कहना है कि ऐसे कागजी और खानापूर्ति वाले आदेश हर साल मानसून या खराब मौसम को देखकर जारी कर दिए जाते हैं।

​जमीन पर इन आदेशों का कितना पालन होता है, इसकी पोल इस हादसे ने खोल दी है। अफसरों की इस लापरवाही और ‘रस्म अदायगी’ के कारण आज आम जनता की जान दांव पर लगी हुई है। अब देखना यह होगा कि स्ट्रक्चरल इंजीनियर को नोटिस देने के बाद क्या निगम के दोषी अधिकारियों पर भी कोई गाज गिरती है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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