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औंधे मुंह गिरा होर्डिंग, टूटे बिजली के तार और खंबे। भगवान भरोसे नगर निगम

तकरीबन 56 लाख बकाया होने पर भी जारी की थी परमिशन। स्ट्रक्चर की मजबूती का सर्टिफिकेट संदेह के घेरे में। हो सकती थी बड़ी जनहानि !

अंशुल मित्तल, ग्वालियर। नगर निगम द्वारा स्वीकृत किया गया विशालकाय होर्डिंग जरा सी आंधी में धराशाई हो गया। इस घटना में बड़ी जनहानि हो सकती थी जो कि “भगवान की कृपा” से नहीं हुई लेकिन नगर निगम ने लापरवाही करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

बता दें कि मोती महल रोड पर, LIC ऑफिस के सामने चौपाटी के अंदर लगा एक बड़ा होर्डिंग देर रात आई आंधी में भरभरा कर गिर पड़ा। जिससे बिजली के तार और खंबे भी काफी डैमेज हुये और इस वजह से तकरीबन तीन-चार घंटे तक क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित रही। गनीमत यह रही कि होर्डिंग स्ट्रक्चर रोड की साइड नहीं गिरा, वरन बड़ी जनहानि लाजमी थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि होर्डिंग शाखा के जिम्मेदारों ने क्या जांचकर इस होर्डिंग की परमिशन दी थी।

स्ट्रक्चर की मजबूती मापने का पैमाना और नियम ?

नियमानुसार होर्डिंग स्ट्रक्चर खड़ा करने की मंजूरी जारी होने से पहले निगम आवेदक से “स्ट्रक्चर सर्टिफिकेट” लेता है। जिसमें स्ट्रक्चर की मजबूती की पुष्टि की जाती है। यह सर्टिफिकेट किसी योग्य आर्किटेक्ट द्वारा मौके का परीक्षण कर जारी किया जाता है।

क्या फर्जी था “स्ट्रक्चर सर्टिफिकेट” ?

होर्डिंग स्ट्रक्चर गिरने की घटना के बाद सुगबुगाहट है कि निगम की होर्डिंग शाखा के जिम्मेदारों ने “सांवरिया सेठ” फर्म को इस होर्डिंग की परमिशन देने से पहले, स्ट्रक्चर सर्टिफिकेट की सत्यता जांची ही नहीं। यदि ऐसा है तो पब्लिक की जान से खिलवाड़ करने के एवज में जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

ग़ौरतलब है कि कुछ समय पहले, इसी जगह पर लगा, एक और होर्डिंग इसी तरह से धराशाई हो चुका है।


56 लाख वसूले नहीं, जारी कर दी होर्डिंग परमिशन

सूत्र बता रहे हैं कि जिस भूमि पर यह होर्डिंग स्ट्रक्चर खड़ा था, उस संपत्ति पर होर्डिंग शाखा ने 56 लाख रुपए बकाया बताते हुए, नोटिस जारी किया था। उन 56 लाख रूपयों की वसूली आज तक निगम द्वारा नहीं की गई। निगम की होर्डिंग शाखा के जिम्मेदार विभाग के ही 56 लाख रुपए भूल गए और इस स्थान पर दूसरी “होर्डिंग परमिशन” जारी कर दी।

क्या खुलेगा 18 करोड़ के नोटिसों का खेल ?

कुछ समय पहले इस 56 लाख के नोटिस सहित 18 करोड़ वसूली के नोटिस होर्डिंग शाखा के अफसरों ने जारी किए थे। सवाल है कि कहां है वह 18 करोड़ ? और इस “18 करोड़..” की प्रक्रिया में ऐसे कितने स्थान है जहां बिना वसूली किए दोबारा “होर्डिंग परमिशन” की गईं हैं ? क्या वो 18 करोड़ रुपए के नोटिस,  वाकई “विभाग के लिए ” वसूली करने को जारी किए गए थे ?

कुछ कहती है अफसरों की चुप्पी…

खबर में उठाए जा रहे मुद्दे और हादसे की जिम्मेदारी तय करने संबंधी सवाल निगम अफसरो से व्हाट्सएप के माध्यम से पूछे गए लेकिन खबर लिखे जाने तक, किसी भी अफसर का कोई रिप्लाई नहीं आया। इसके अलावा कॉल रिसीव न करने और फोन नंबर स्विच ऑफ होने जैसी स्थिति देखी गई।

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