PIN की खबर का बड़ा असर, संपत्तिकर की रकम रोकने वाला टीसी सस्पेंड। APTO को “कारण बताओ नोटिस” जारी
2 साल पुराने एक घोटाले के तहत, संपत्तिकर की एक करोड रुपए की रकम अब भी अधर में !

ग्वालियर। पब्लिक इंटरेस्ट न्यूज़ (PIN) की खबर का एक बड़ा असर देखने को मिला है जहां नगर निगम कमिश्नर ने संपत्तिकर की रकम को महीनों बाद, निगम खाते में जमा करने वाले कर्मचारी, अंकित शर्मा पर कड़ी कार्रवाई करते हुए, उसे निलंबित कर दिया है।

बता दें कि PIN ने 8 जून को खबर प्रकाशित कर नगर निगम का एक घोटाला उजागर किया था। मामला ऐसा था कि निगम कर्मचारी अंकित शर्मा ने वार्ड 25 में टीसी रहते हुए प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में वसूल होने वाली 25 लाख रुपए की रकम, तकरीबन 3 महीने तक निगम खाते में जमा नहीं कराई थी। वर्तमान में अंकित शर्मा राजस्व विभाग में कार्यरत थे। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और अंकित शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा संबंधित APTO को भी “कारण बताओ” नोटिस जारी किया गया है।
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इससे बड़ा घोटाला, जहां गायब हुई करोड़ों की रकम !
निगम की गर्त में से निकलने वाला यह पहला घोटाला नहीं है। इससे पहले भी प्रॉपर्टी टैक्स की तकरीबन 1 करोड़ रुपए की रकम, निगम के जादूगरों द्वारा पचा ली गई थी । बता दें कि वर्ष 2023 दिसंबर में निगम के सॉफ्टवेयर पर “रैनसमवेयर अटैक” हुआ था। 21 दिसंबर को सॉफ्टवेयर काम करना बंद कर गया था। इसका फायदा उठाकर 66 में से 44 वार्डों के कारिंदों ने 20 दिसंबर 2023 को वसूल की गई रकम को, निगम खाते में जमा ही नहीं कराया !
टैक्स कैल्कुलेशन कंफर्म, तो “अनुमानित” राशि क्यों ?
खबर है कि मामला खुलते देख, कुछेक टीसीयों ने “अनुमानित राशि “ लिखते हुए 21 दिसंबर 2023 से पहले की कुछ राशि तकरीबन 8-9 महीनों बाद निगम खाते में जमा की है ! पूरे मामले में ऑडिट करने के जिम्मेदारों की भी बड़ी लापरवाही सामने आ रही है !
सवाल यह है कि जब 66 वार्डों में से 22 वार्डों ने समय रहते रकम जमा कर दी थी तो बाकी की रकम आठ नौ महीने बाद “अनुमानित” लिखकर क्यों आई ?
जनता का प्रॉपर्टी टैक्स, लाभ कमा रहा कौन ?
बहरहाल मुद्दा यह है कि शहर का आमजन अपनी गाड़ी कमाई से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करता है। समय से प्रॉपर्टी टैक्स न देने पर आमजन की प्रॉपर्टी पर तालाबंदी तक कर दी जाती है। निगम द्वारा दावा किया जाता है की प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा जनता के हित में खर्च किया जाएगा। ऐसे में पब्लिक को सवाल पूछने का अधिकार है कि जनता के हित में खर्च होना तो छोड़ो, वह पैसा निगम खाते में जमा हो भी रहा है या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है ?




