“अपील समिति” के उद्देश्य पर खड़े हुए सवाल ? भाजपा पार्षद बोले – 15 करोड़ के नोटिस मामले में भी घपला
नगर सरकार के "अपीलीय बोर्ड" के हस्तक्षेप के चलते, सरकारी जमीनें और एक करोड़ से अधिक का प्रॉपर्टी-टैक्स अधर में लटका !

@अंशुल मित्तल
ग्वालियर /नगर-निगम के फैसलों में न्याय से वंचित या असंतुष्ट रहने वाले, आम नागरिक की सुनवाई करना और विभिन्न प्रकरणों में न्याय दिलाना, नगर सरकार की “अपील समिति” का उद्देश्य बताया गया है। खबर में आगे बताए जा रहे मामलों और भाजपा पार्षद के बयान बताते हैं कि कई मामलों “अपील समिति” की दखलंदाजी से न सिर्फ भूमाफियाओं को शह मिली है बल्कि निगम प्रशासन को भी करोड़ों रूपए रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
EOW में शिकायत, पूर्व कमिश्नर ने निरस्त की अवैध भवन अनुज्ञा। अपील समिति के दखल के बाद निर्माण जारी !
वार्ड 30 के अंतर्गत, नगर निगम मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर, निर्माणाधीन एक बहुमंजिला इमारत की बिल्डिंग परमिशन, वर्ष 2025 में गुलाबचंद एवं ताराबाई जैन आदि के नाम से जारी की गई थी।
EOW में हुई शिकायत से सामने आया कि नियमों को दरकिनार करते हुए, GDA की NOC के बिना, तत्कालीन भवन अधिकारी राकेश कश्यप ने यह मंजूरी जारी की थी।
GDA के पत्रों और जांच के बाद, पूर्व कमिश्नर ने गड़बड़ी के जिम्मेदार राकेश कश्यप को बचाते हुए, इस मंजूरी को निरस्त कर दिया।
इसके बाद मामला निगम की “अपील समिति” के समक्ष पहुंचा। समिति ने तत्कालीन आयुक्त के निरस्तीकरण आदेश पर आगामी आदेश तक स्थगन लगा दिया।
यहीं से सवाल उठता है—यदि बिल्डिंग परमिशन की वैधता को लेकर, निगम स्तर पर जांच के बाद, निरस्त कर दिया गया था, तो अपील समिति के स्थगन के बाद निर्माण कार्य की स्थिति क्या है और “अपील समिति” ने प्रश्नाधीन निर्माण कार्य पर भी रोक लगाई थी या नहीं ? क्योंकि बिल्डिंग का निर्माण तो खुलेआम जारी है ।
सरकारी जमीन पर हो रहे कंस्ट्रक्शन पर दिया “स्थगन” खुद ही हटाया ?
वार्ड 28 में थाटीपुर थाने के पास, सर्वे नंबर 307 की सरकारी जमीन को कूटरचित दस्तावेजों से निजी बताते हुए निजी व्यक्तियों के नाम से बिल्डिंग परमिशन जारी कर दी गई थी। तत्कालीन BO द्वारा किए गए इस कारनामे पर अपील समिति ने “स्थगन आदेश” जारी करते हुए पहले तो निर्माण पर रोक लगाई। लेकिन अचंभे की बात यह है कि कुछ दिनों बाद खुद अपील समिति ने ही अपना “स्थगन आदेश” वापस ले लिया।
इस मामले में निगम द्वारा जमीन के सीमांकन के लिए पत्र भी लिखे गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन के वास्तविक मालिकाना हक और सीमांकन की स्थिति स्पष्ट नहीं थी, तब निर्माण से संबंधित रोक हटाने का आधार क्या था ?
50% टैक्स राशि जमा करवाए बिना, की अपील की सुनवाई, निगम को करीब 1.5 करोड़ का घाटा
वार्ड 59 के अंतर्गत भारतीयम विद्या निकेतन पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 3 करोड रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था। प्रॉपर्टी के मालिकों ने टैक्स मांग के विरुद्ध “अपील समिति” में अपील की।
क्या कहता है Act – म.प्र. म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट- 1956 की धारा 138 की उप धारा (4) की अनिवार्य शर्त यह है कि “टैक्स संबंधित कोई भी अपील की सुनवाई तब तक नहीं की जा सकती, जब तक मांगी गई राशि का, कम से कम 50% भाग, अपीलकर्ता द्वारा जमा नहीं करा दिया जाता। अपीलार्थी को अपील के साथ 50% रकम जमा करने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।”
बता दें कि यहां “अपील समिति” ने प्रॉपर्टी टैक्स मांग के विरुद्ध अपील स्वीकार कर ली। जबकि अपीलकर्ता से मांगी गई टैक्स राशि की 50% रकम, निगम खाते में जमा नहीं कराई गई।
यहां सवाल बनता है कि अपील समिति ने किस नियम के तहत बिना 50% राशि जमा कराए बिना टैक्स मामले की अपील स्वीकार की ?
पार्षद का कटाक्ष- “राम-राम जपना, पराया माल अपना”
अपील समिति केवल जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है। भारतीयम् विद्या निकेतन के प्रॉपर्टी टैक्स मामले की बात करें तो यहां अपील समिति ने सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन किया है। इसके अलावा किसी विवादित निर्माण पर पहले स्थगन देना और फिर अपना स्थगन वापस ले लेना, आखिर क्या है ? होर्डिंग शाखा के 15 करोड़ रुपए के नोटिस मामले में भी अपील समिति ने दखलंदाजी की इस कारण, दीपक जेठवानी को लाभ पहुंचा और निगम को बड़ा नुकसान हुआ। पारदर्शिता समाप्त हो चुकी है। समिति का मंत्र है राम राम जपना, पराया माल अपना। लेकिन अब भाजपा का भी एक सदस्य अपील समिति में जुड़ा है अब ऐसी कार्यप्रणाली पर लगाम लगेगी।
बृजेश श्रीवास, भाजपा पार्षद, वार्ड-21, ग्वालियर
नोट: खबर में उल्लेखित आरोप, संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए दावों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित भवन मालिकों, अपीलकर्ताओं, अधिकारियों तथा अपील समिति का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकेगा ।
नोट- खबर में वर्णित मामलों को विस्तार से जानने के लिए नीचे दी गई “LINKS” पर क्लिक करें..
नगर निगम- “भ्रष्टाचार की मंजूरी” मामले पर कार्रवाई के आसार, कल सुनवाई
नगर निगम में ‘परमिशन घोटाला’ ? जांच के घेरे में मंजूरी, फिर भी जारी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन




