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कॉलेज प्रबंधन की भारी लापरवाही; B.A. के एग्जाम में बांट दिया B.S.C. का प्रश्नपत्र

ह्रिदेश साहू ,​दतिया। जिले के अग्रणी पी.जी. कॉलेज में शिक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की एक ऐसी बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने न केवल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सैकड़ों छात्रों के भविष्य और उनकी मेहनत को भी दांव पर लगा दिया है। कॉलेज के जिम्मेदारों की उदासीनता का आलम यह है कि परीक्षा कक्ष में मौजूद ड्यूटी इंचार्ज तक को यह पता नहीं था कि छात्रों को किस विषय का पेपर बांटा जा रहा है।

तारीख पर तारीख: 15 दिन बाद भी एग्जाम में बांटा गलत पेपर

पूरा मामला B.A. द्वितीय वर्ष के ‘स्टडी ऑफ फिक्शन’ विषय की परीक्षा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार:

  • पहली तारीख : यह परीक्षा पूर्व में 25 अप्रैल 2026 को आयोजित होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया और छात्रों को यह कहकर वापस भेज दिया गया कि अब परीक्षा 11 मई 2026 को होगी।
  • दूसरी तारीख (11 मई ): जब छात्र सोमवार को फिर से परीक्षा देने पहुंचे, तो कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही की पराकाष्ठा देखने को मिली। B.A. के छात्रों के हाथों में B.S.C. का प्रश्नपत्र थमा दिया गया।

मैडम AC में, छात्र धूप में : ड्यूटी इंचार्ज को भी नहीं थी खबर

​हैरानी की बात यह रही कि क्लास रूम में तैनात ड्यूटी इंचार्ज को भी इस बात का आभास नहीं हुआ कि विषय गलत है। जब छात्रों ने खुद प्रश्नपत्र देखकर विरोध जताया और कहा कि “मैडम यह पेपर गलत है “… तब जाकर प्रबंधन हरकत में आया। आनन-फानन में पेपर वापस लिए गए और छात्रों को एक बार फिर नई तारीख 14 मई 2026 थमाकर घर रवाना कर दिया गया।

छात्रों में भारी आक्रोश, प्रिंसिपल साहिबा मौन

​तपती गर्मी और भीषण धूप के बीच बार-बार कॉलेज के चक्कर काट रहे छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। छात्रों का आरोप है कि:

“एक तरफ हमें समय की पाबंदी सिखाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम में बैठे जिम्मेदार अंधे होकर काम कर रहे हैं। अधिकारी और शिक्षक खुद ए.सी. (A.C.) कमरों में बैठे हैं, जबकि हमें इस झुलसा देने वाली धूप में परेशान किया जा रहा है। “

इस पूरे घटनाक्रम पर कॉलेज की प्रिंसिपल महोदया ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। पक्ष जानने के लिए पीजी कॉलेज की प्रिंसिपल जयश्री त्रिवेदी को फोन पर संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब देखना यह होगा कि बार-बार हो रही इन गलतियों के लिए जिम्मेदार शिक्षकों और स्टाफ पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है या छात्र इसी तरह सिस्टम की ‘लापरवाही की धूप’ में जलते रहेंगे।

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