ई-टेंडर सेल से क्या फिर लीक होगी “बिड डेट” और गोपनीय डिटेल ? घोटालेबाज के पीछे कौन है “गॉडफादर” ?
परिषद के 'ठहराव' को दरकिनार करना "साजिश" या "लापरवाही" ?

अंशुल मित्तल, ग्वालियर। नगर निगम में एक तबादला आदेश जारी होने के बाद, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि ई-टेंडर सेल, अब फिर से घोटाले में माहिर कर्मचारियों का अड्डा बनने जा रही है ! मंगलवार को निगमायुक्त द्वारा जारी फेरबदल आदेश में विनियमित कर्मचारी, विजय वीर यादव को ई- टेंडर सेल में पदस्थ किया गया। सामने आए तथ्यों के अनुसार विजय वीर यादव विज्ञापन शाखा के साथ-साथ ई टेंडर सेल में घपलेबाजी के जाने-माने खिलाड़ी रहे हैं।
परिषद के “ठहराव ” को छुपाया गया या किया दरकिनार?
नगर निगम परिषद द्वारा पारित ठहराव क्रमांक 175 दिनांक 6 अगस्त 2019 में वर्णित आरोपों के अनुसार ई-टेंडर सेल में कंप्यूटर ऑपरेटर रहते हुए विजय वीर यादव ने “बिड डेट ” लीक करने और अन्य ठेकेदारों द्वारा कोड की गई रकम की जानकारी लीक करने जैसे गंभीर घोटाले को अपने सहयोगियों के साथ अंजाम दिया !
FIR का क्या हुआ : ठहराव में उल्लेखित है कि तत्कालीन कमिश्नर अजय गुप्ता द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर विजयवीर यादव के विरुद्ध घोटाले करने के संबंध में कंप्यूटर शाखा के प्रभारी रहे देवेंद्र चौहान एवं नागेंद्र सक्सेना को FIR दर्ज कराने हेतु आदेशित किया गया था।
ठहराव में निगम आयुक्त को निर्देशित किया गया था कि ई-टेंडर सेल में ऐसे कर्मचारियों को पदस्थ ना किया जाए जो पूर्व में भी शाखा में कार्य कर चुके हों ।
होर्डिंग शाखा में “जीरो ” से करोड़ों का चकमा ?
निगम की होर्डिंग शाखा में रहते विजयवीर यादव का 30 दिन का वेतन रोका गया था। यह घटनाक्रम अभी कुछ महीनों पहले का ही है। निगम के अंदरखानों में चर्चा है कि विजय यादव ने गैंट्री के टेंडर की रकम में से “जीरो” हटाकर करोड़ों रुपए का चकमा देने की कोशिश की ! इनका यह घपला पकड़ा गया, जिसके एवज में इन्हें केवल 30 दिन का वेतन खोना पड़ा।
क्या कमिश्नर को अंधेरे में रखकर, फिट किया गया “मोहरा”?
इस पोस्टिंग के बाद निगम के गलियारों में अब चर्चा के साथ इन सवालों की गूंज सुनाई दे रही है :
- कौन है वो ‘गॉडफादर’ जिसने इस नियुक्ति को अंजाम देने की भूमिका रची और परिषद के ठहराव को फोल्ड कर जेब में छुपा लिया ?
- क्या सोची- समझी रणनीति के तहत, कमिश्नर को अंधेरे में रखते हुए इस ‘मोहरे’ को वहां फिट किया गया है, ताकि गोपनीय जानकारी लीक करवाई जा सके ?
- पारदर्शिता की बलि: जब ई-टेंडर सेल में ही ‘घोटाले का पुराना खिलाड़ी’ बैठा हो, तो वहां होने वाले टेंडरों की निष्पक्षता पर कौन भरोसा करेगा ?




