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नगर निगम में ‘परमिशन घोटाला’ ? जांच के घेरे में मंजूरी, फिर भी जारी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन

 

बिल्डिंग परमिशन घोटाला, EOW जांच, कमिश्नर स्तर मंजूरी, नगर निगम भ्रष्टाचार, बिल्डिंग अप्रूवल मामला, प्रशासनिक लापरवाही

अंशुल मित्तल, ग्वालियर। नगर निगम ग्वालियर में भ्रष्टाचार और उसे संरक्षण देने का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि निगम के चर्चित भवन अधिकारी राकेश कश्यप ने डेवलपमेंट स्कीम के तहत अधिसूचित जमीन पर निजी लोगों को भवन निर्माण की अनुमति देकर नियमों की खुली अनदेखी की।

इस मामले की जांच अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसी ने निगम से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं, लेकिन अब तक निगम द्वारा कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है….।

क्या है पूरा मामला ?

ग्राम महलगांव, सिटी सेंटर मुख्य मार्ग स्थित सर्वे नंबर 652 की जमीन पर 16,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में भवन निर्माण की अनुमति (क्रमांक: GWA/0101/293/2025) श्रीमती ताराबाई के नाम जारी की गई।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह जमीन GDA (ग्वालियर विकास प्राधिकरण) की डेवलपमेंट स्कीम के अंतर्गत अधिसूचित है। नियमानुसार यहां निर्माण अनुमति से पहले GDA से NOC लेना अनिवार्य था — जो नहीं लिया गया।

_यानी बिना वैधानिक अनुमति के ही निगम अधिकारियों ने मंजूरी जारी कर दी।

एक और संदिग्ध प्रकरण पेंडिंग

इसी सर्वे नंबर 652 पर 12,750 वर्गफुट क्षेत्र में एक और भवन निर्माण आवेदन (GWA/0101/1853/2025) आशा ग्रोवर द्वारा किया गया, जो अब तक निगम में लंबित है।

_एक ही जमीन, एक जैसे मामले — फिर भी एक को मंजूरी और दूसरा पेंडिंग ! इससे सवाल उठना लाजिमी है।


GDA ने साफ किया इनकार

20 फरवरी 2026 को जारी पत्र में GDA ने दोनों मामलों में NOC देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। पत्र में कहा गया कि यह भूमि संशोधित टाउन डेवलपमेंट स्कीम का हिस्सा है और अधिसूचित श्रेणी में आती है।

जांच के बीच जारी निर्माण

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि विवादित जमीन पर अब भी तेजी से निर्माण कार्य जारी है, मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी होते हुए भी निगम इसे रोकने में नाकाम रहा है।


कमिश्नर लेवल पर लापरवाही कैसे मुमकिन ?

खबर में बताए गए दोनों ही बिल्डिंग परमिशन के मामले, क्षेत्रफल के हिसाब से कमिश्नर लेवल के हैं। जिस मामले की जांच ईओडब्ल्यू में लंबित है उसके बारे में माना जा रहा है कि कमिश्नर को गुमराह कर वह मंजूरी जारी करवा दी गई। लेकिन नजर डालें आवेदक आशा ग्रोवर वाले मामले पर, तो कई सवाल खड़े होते हैं…

  • ईओडब्ल्यू में जांच पहुंचने और GDA का पत्र सामने आने के बाद, कमिश्नर द्वारा मंजूरी निरस्त करते हुए राकेश कश्यप पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई ?
  • एक जैसे प्रकरण होने के बाद भी आशा ग्रोवर का आवेदन आज तक पेंडिंग है। किसके इंतजार में ?
  • गड़बड़ियां सामने आने के बाद क्या कमिश्नर द्वारा तत्कालीन सिटी प्लानर अजय प्रताप सिंह जादौन से जवाब तलब किया जाएगा ?
  • अब जबकि कमिश्नर की ही इमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं तो क्या अब राकेश कश्यप को सभी मामलों में निष्पक्ष जांच का सामना करना पड़ेगा ?

BO कश्यप के लिए नया नहीं, यह कारनामा

भवन अधिकारी राकेश कश्यप के लिए यह कारनामा नया नहीं है । क्योंकि यह वह अफसर हैं जो बिल्डिंग परमिशन देकर सरकारी जमीन तक को ठिकाने लगाने और शिकायतों को रफा-दफा करवाने में महारथी माने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ कारनामें :

  • सरकारी जमीन… निजी फायदा : नवंबर 2024 में कश्यप ने वार्ड 28 में बैकुंठी बाई आदि के नाम से एक भवन निर्माण मंजूरी जारी की। इसके बाद शासन की करोड़ों की जमीन, गफलत में पड़ गई है।
  • मंदिर की जमीन भी… : वार्ड 32, चुन्नीपुरा क्षेत्र में, गंगादास की बड़ी शाला, मंदिर की जमीन को नोटरी कर बेचा जा रहा है। यहां अवैध भवन निर्माण करने वालों के संरक्षक बने हैं क्षेत्र के वर्तमान BO राकेश कश्यप ।
  • GDA की जमीन पर शराब दुकान की शिकायत : कुछ महीनों पहले थाटीपुर में बनी शराब दुकान के खिलाफ निगम जनसुनवाई में शिकायत पहुंची थी। कश्यप ने शराब दुकान को 25-30 साल पुराना बताते हुए शिकायत को बंद कर दिया था। जबकि मामले में जीडीए का एक पत्र भी सामने आया था।
    चित्र-1 शराब दुकान की शिकायत। चित्र -2 में तत्कालीन बिल्डिंग ऑफिसर राकेश कश्यप का क्लोजर

ऐसे अनेकों मामले सामने आने के बावजूद कमिश्नर इनके विरुद्ध कोई एक्शन नहीं ले पा रहे हैं। क्या इसका कारण सिर्फ यही है कि BO कश्यप, कमिश्नर के चहेते माने जाते हैं…? जो भी हो लेकिन इनकी कारगुजारियों से शहर का भूगोल बिगड़ रहा है।


बहरहाल पूरे मामले में अब तक ईओडब्ल्यू द्वारा नगर निगम के वर्तमान सिटी प्लानर महेंद्र अग्रवाल से भी जवाब-तलब किए गए थे। बताया जा रहा है कि महेंद्र अग्रवाल ने ताराबाई की बिल्डिंग परमिशन को निरस्त करने की नोटशीट अपनी तरफ से बढ़ा दी है। जबकि यह मामला/मंजूरी पुराने सिटी प्लानर, एपीएस जादौन के समय की है। सूत्र बताते हैं कि वे कश्यप के गरीबी थे और रिटायरमेंट के बाद उनकी संविदा नियुक्ति के लिए कश्यप द्वारा भरसक प्रयास किए गये थे !

गलत पाए जाने पर निरस्त होगी मंजूरी

जीडीए और टीएंडसीपी के अफसरों से बातचीत के साथ संबंधित आवेदकों की सुनवाई भी चल रही है। नियमविरुद्ध पाए जाने पर मंजूरी निरस्त की जाएगी। इस सप्ताह इस प्रकरण में उचित कार्रवाई करेंगे।

संघ प्रिय, कमिश्नर, नगर निगम, ग्वालियर

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