“सेंटेला की सेटिंग” के आगे ‘दंडवत’ निगम अफसर, भवन शाखा से लेकर होर्डिंग शाखा तक बजता है ‘डंका’ ❗️
चढ़ावे का चमत्कार नहीं तो क्या ? - होटल के बेसमेंट में निगम के पूर्व अपरायुक्त की रिटायरमेंट पार्टी हुई थी। जिसमें तत्कालीन कमिश्नर सहित कई अफसर शामिल हुए थे। लेकिन कार्रवाई नहीं।

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर / पाॅश इलाके में स्थित सेंटेला होटल की टीएंडसीपी मंजूरी करीब 2 महीने पहले निरस्त हो चुकी है। इसके बाद निगम की भवन शाखा के अफसरों अफसर की जो भूमिका सामने आई, उसके बाद यह सवाल पूछा जाना लाजमी है कि क्या गरीब आमजन और रसूखदारों के लिए भवन विकास के नियम अलग-अलग हैं ?
होटल सेंटेला की सेटिंग में सेट रहे हैं निगम के CP, BO और ZO ?
बता दें कि मानिक विलास कॉलोनी, वार्ड नंबर 30 में, यह बिल्डिंग तकरीबन 8 साल पहले बनाई गई। इमारत मंजूरी के अनुरूप बनी थी या नहीं, इसकी निगरानी करना निगम की भवन शाखा के अफसरों की जिम्मेदारी थी। लेकिन:
- “वाणिज्य कार्यालय” की मंजूरी लेकर, होटल बना दिया गया।
- बेसमेंट में पार्किंग नहीं , सगाई और रिटायरमेंट पार्टी जैसे प्रोग्राम करवाए जाते रहे।
- बेसमेंट में निगम के पूर्व अपरायुक्त अनिल दुबे की रिटायरमेंट पार्टी भी हुईं। जिसमें तत्कालीन कमिश्नर सहित कई अफसर शामिल हुए।
- फ्रंट एमओएस पर अतिक्रमण किया गया।
- बिल्डिंग को मंजूरी से अधिक ऊंचाई का बनाया गया ।
लेकिन पिछले करीब 8 सालों से निगम के अफसरों को यह कमियां नहीं दिखाई दीं । हालांकि टीएंडसीपी ने जानकारी सामने आते ही मंजूरी निरस्त कर दी। लेकिन भवन शाखा के कर्ताधर्ता कार्रवाई के सवाल पर “अबोध बालक “ की तरह जवाब कर रहे हैं !
कंपाउंडिंग के नाम पर भी खेल
वर्ष 20-2021 के दरमियान आए कंपाउंडिंग के नियम का भी अफसरों ने भरपूर लाभ उठाया। जबकि फ्रंट एमओएस पर अतिक्रमण और स्वीकृत ऊंचाई से अधिक का निर्माण, कंपाउंडिंग के दायरे में नहीं है। फिर भी तत्कालीन अफसरों ने कंपाउंडिंग के नाम पर माल बटोरा। खबर यह भी है कि निगम अफसरों ने इस नियम के जरिए शहर की कई बिल्डिंगों से भारी धनराशि की अवैध उगाही की है !
होर्डिंग शाखा में भी बजता है “गुप्ता” का डंका !
“श्रीमती अर्चना गुप्ता” के नाम से कमर्शियल ऑफिस की मंजूरी लेकर, होटल का संचालन किया जा रहा है। इनके पति अजय गुप्ता नगर निगम में “अजय एडवरटाइजिंग” फर्म के नाम से ठेकेदारी करते हैं।
“विज्ञापन पर मिलेगा किराया “ इस झांसे में नीलाम हुई संपत्ति !
तकरीबन 4 साल पहले पहले शिंदे की छावनी स्थित शान शौकत शोरूम के सामने शांति देवी भार्गव की बिल्डिंग पर, किराए का झांसा देकर, एक अवैध विज्ञापन लगाया गया था। जिसे निगम ने अवैध माना और होर्डिंग शाखा के तत्कालीन अफसरों ने भवन मालिक के ऊपर कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग को नीलाम किया और 30 लाख रुपए की वसूली की !
संपत्ति मालिक के नाम से करते हैं अवैध विज्ञापन का खेल, जुर्माने पर झाड़ लेते हैं पल्ला
अब भी अजय एडवरटाइजिंग के द्वारा शहर में ऐसे कई विज्ञापन स्ट्रक्चर खड़े हैं, जिनकी मंजूरी बिल्डिंग/संपत्ति मलिक के नाम से ली गई है। सूत्र बताते हैं कि इनके ऐसे कई विज्ञापनों पर जुर्माना नोटिस जारी किए गए हैं। और जुर्माने की रकम आज तक जमा नहीं हुई है। अब कल को फंसेगा तो संपत्ति मालिक !
बहरहाल टीएंडसीपी से मंजूरी निरस्तीकरण के आदेश के खिलाफ सेंटेला के संचालक ने संभागीय कमिश्नर कार्यालय में अपील की है। निगम को पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए थी जो कि नहीं की गई। अब निगम अफसर दलील दे रहे हैं कि “हमने नोटिस जारी किए हैं…” अंततः यह सवाल बना रहेगा कि जब निगम की जिम्मेदारी थी तो तत्कालीन और वर्तमान अफसरों को ऐसा क्या मिला, जिसके बदले समय रहते कार्रवाई नहीं की गई…??




