प्रॉपर्टी ID से सावधान 🚨 कहीं आपकी संपत्ति की फर्जी ID बनाकर, बेच ना दें माफिया ! निगम में बैठे हैं घोटालेबाज !
संपत्तिकर रिकॉर्ड में नाम बदला, बनाई फर्जी टैक्स-रसीद। घोटालेबाजों ने रजिस्ट्री कर बेच दी प्रॉपर्टी। शिकायत से हुआ खुलासा, रिटायर्ड अधिकारी सहित 4 पर FIR दर्ज।

@अंशुल मित्तल
ग्वालियर / नगर निगम के मलाईदार पदों पर रह चुके रिटायर्ड कर्मचारी महेंद्र शर्मा का एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। जहां प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड में फेरबदल कर, फर्जी रसीद बनाई गई और इन्हीं कूटरचित कागजों के आधार पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हो गई। फरियादी की शिकायत और निगम प्रशासन के पत्र के बाद यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने महेंद्र शर्मा सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायत नहीं होती तो निगम पकड़ पाता यह घोटाला?
ताजा मामला वार्ड नंबर 30 का है, जहां जागृति नगर में विजय पुत्र राजा रामपाल की 3000 वर्गफुट की प्रॉपर्टी है। इस प्रॉपर्टी के मूल संपत्तिकर आईडी न. 1000255876 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बदलकर 1000107294 किया गया। साथ ही असली संपत्ति मालिक के स्थान पर जय नारायण पुत्र उदय सिंह का नाम दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि शिकायतकर्ता सुरेश बनवानी की शिकायत से सामने आया कि प्रॉपर्टी का एड्रेस भी चेंज करते हुए एक फर्जी रसीद जारी की गई। इन सब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर, प्रॉपर्टी के फर्जी मालिक बने, जयनारायण ने 15 मई 2025 को रजिस्ट्री करते हुए, यह प्रॉपर्टी अशोक सिंह पुत्र नन्हे सिंह को बेच दी।
सवाल हैं कि “जिम्मेदार कौन” ?
- निगम प्रशासन ने अपने विवेक से, अब तक ऐसे कितने घोटाले पकड़े हैं ?
- इस मामले में भी यदि शिकायत नहीं होती तो क्या निगम प्रशासन इस घोटाले को पकड़ पाता ?
- निगम टैक्स वसूलने के लिए संपत्तिकर आईडी बनाता है। निगम के जादूगर इसी सिस्टम के जरिए आम जनता की प्रॉपर्टी ठिकाने लगा रहे हैं। जिम्मेदार कौन ?
- क्या निगम प्रशासन इस घोटाले के आरोपी, महेंद्र शर्मा की पेंशन रोकने की कार्रवाई करेगा..?
लाॅग रिपोर्ट ने खोली पोल
तथ्यों की माने तो घोटाला करने की नीयत से, संपत्ति कर आईडी में, कुछ ही घंटे के अंतराल में, दो बार संशोधन किया गया। ई नगर पालिका से मिली लाॅग रिपोर्ट के अनुसार 20 मार्च 2025 को शाम 4:17 बजे मूल संपत्तिकर ID में संपत्ति स्वामी का नाम, (विजय पुत्र राजारमपाल से) बदलकर जयनारायण पुत्र उदय सिंह किया गया। कुछ देर बाद शाम 5:41 पर प्रॉपर्टी का एड्रेस जागृति नगर-37 से बदलकर 01 टैगोर नगर-30 कर दिया गया। निगम में मूल रसीद से लेकर कथित फर्जी रसीद लेजर रजिस्ट्री अधिकारियों की रिपोर्ट और अन्य डिजिटल प्रमाण पुलिस को सौंप दिए हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी का क्रय-विक्रय करने वाले अशोक सिंह और जय नारायण सहित निगम के एक टीसी नरेंद्र कुशवाह और महेंद्र शर्मा के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
संविदाकर्मी रहते किया यह घोटाला, इकलौता नहीं !

घोटाले के मुख्य आरोपी माने जा रहे, महेंद्र शर्मा 31 जनवरी 2025 को नगर निगम से रिटायर हुए थे। अब इसे निगम सेवा की ललक कहें या भ्रष्टाचार की आदत… धनबल और कृपा की दम पर 3 फरवरी 2025 को यह संविदानियुक्ति का आदेश लेकर, फिर निगम में आ गए ! लेकिन संविदाकाल पूरा होने से पहले ही, महेंद्र शर्मा के इसी तरह के, तीन घोटाले सामने आए। जिसके चलते तत्कालीन कमिश्नर ने इन्हें संविदा सेवा से बर्खास्त कर दिया था। (देखें पत्र👆🏻)
करोड़ों की टैक्स चोरी सहित निगम की बेशकीमती जमीन ठिकाने लगाने के मास्टरमाइंड रहे हैं “शर्मा जी ” !
नौकरी में रहते हुए महेंद्र शर्मा के अनेकों घोटाले सामने आए। बावजूद इसके इन्हें संविदा नियुक्ति के दौरान, निगम के सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर बैठाया गया। इसके बाद मुरार क्षेत्र में स्थित लगभग 50 करोड़ की बेशकीमती जमीन, निगम के हाथ से निकल गई। सूत्र बताते हैं कि शर्मा जी सहित, राजस्व विभाग के दो लोगों की जुगलबंदी से यह कारनामा सफल हो सका ! इनाम के तौर पर इस जोड़ी को एक करोड़ रुपए का चढ़ावा भी मिला ! इसके अलावा महेंद्र शर्मा ने पद पर रहते हुए एक कमर्शियल संपत्ति का करोड़ों रुपए का टैक्स माफ कर दिया था। खबर है कि जल्द ही यह दोनों मामले, लोकायुक्त जांच के घेरे में आ सकते हैं ।
फर्जी आईडी से रजिस्ट्री और फर्जी रजिस्ट्री से नामांतरण.. अब भी जारी !
इस ताजा मामले सहित निगम के कई वार्ड ऐसे हैं जहां न सिर्फ फर्जी रजिस्ट्रियों के आधार पर नामांतरण किए जा रहे हैं बल्कि भू माफिया की सहूलियत के लिए फर्जी संपत्तिकर आईडी भी बना दी जाती है ! समय-समय पर ऐसे कई घोटाले सामने आते रहे हैं लेकिन निगम प्रशासन ने अब तक, मास्टरमाइंड को नापने की बजाय मामले को रफादफा ही किया है !




