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​नगर पालिका कांड : ऑपरेटर की बर्खास्तगी तो सिर्फ झांकी है, असली ‘खिलाड़ी’ अभी बाकी हैं ? क्या बड़े चेहरों को बचाने के लिए फोड़ा गया संविदा कर्मी पर ठीकरा?

ग्वालियर, डबरा /भोपाल। नगरीय प्रशासन विभाग मध्य प्रदेश ने डबरा नगर पालिका में सामने आए वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्यवाही की है। विभाग ने संपत्ति कर की रसीदें डिलीट करने और आईडी का दुरुपयोग करने के आरोपी संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर राघवेंद्र शर्मा को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। साथ ही, विभाग ने संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध पुलिस थाने में FIR दर्ज कराने के भी कड़े निर्देश जारी किए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

​भोपाल से जारी आदेश के अनुसार, डबरा नगर पालिका परिषद में ‘ईएनपी 2.0’ (eNP 2.0) पोर्टल पर संपत्ति कर की रसीदों को अवैध रूप से डिलीट किया गया और उच्चाधिकारियों (HOD) की आईडी का अनाधिकृत इस्तेमाल किया गया। इस गंभीर वित्तीय हेराफेरी के कारण नगर पालिका को बड़े राजस्व की हानि हुई है ! गौरतलब है कि बीते दिनों इसी मुद्दे को लेकर नगर पालिका में भारी हंगामा हुआ था। खबर है कि पार्षदों और कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई थी।

सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल: क्या ऑपरेटर सिर्फ ‘मोहरा’ है ?

​इस कार्यवाही के बाद शहर के गलियारों और राजनीतिक हलकों में एक बड़ा सवाल तैर रहा है। चर्चा यह है कि क्या एक संविदा स्तर का कंप्यूटर ऑपरेटर इतने बड़े पैमाने पर सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ कर सकता है ?

​प्रमुख सवाल जिन पर जाँच होनी चाहिए :

  • वरिष्ठों की भूमिका : क्या वरिष्ठ अफसरों की आईडी का उपयोग, उनकी जानकारी या पासवर्ड साझा किए बिना संभव था ?
  • मौन सहमति : क्या विभाग के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की रजामंदी के बिना रसीदें डिलीट करने का यह खेल महीनों तक चल सकता था ?
  • बलि का बकरा : क्या प्रशासन ने एक छोटे कर्मचारी पर ठीकरा फोड़कर विभाग के उन ‘मगरमच्छों’ को सुरक्षित रास्ता दे दिया है, जिनके संरक्षण में यह भ्रष्टाचार पनपा ?

पब्लिक की डिमांड : निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जाँच

आम जनता और जागरूक पार्षदों का मानना है कि यदि इस मामले की गहराई से जाँच की जाए, तो कई बड़े अधिकारी और प्रभावशाली लोग इसकी जद में आ सकते हैं। केवल एक कर्मचारी की बर्खास्तगी और FIR से भ्रष्टाचार की जड़ें खत्म नहीं होंगी।

​अब देखना यह होगा कि डबरा पुलिस और नगरीय प्रशासन विभाग क्या केवल ऑपरेटर तक अपनी कार्यवाही सीमित रखता है या उन सफेदपोशों तक भी पहुँचता है जिनके इशारे पर यह पूरा खेल खेला गया।

अंशुल मित्तल, ग्वालियर- 8770226566

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