निगम सॉफ्टवेयर पर ‘मैलवेयर’ का साया: क्या फिर मचेगी लूट ? करोड़ों की चपत लगाने की तैयारी में बैठे घोटालेबाज !
जनता की मेहनत की कमाई पर फिर मंडराया रैनसमवेयर अटैक जैसा खतरा। 2023 की 'डिजिटल डकैती' से नहीं लिया सबक; डाटा उड़ने की आड़ में भ्रष्टाचारियों ने डकारी थी जनता की गाढ़ी कमाई, अब फिर वही खेल शुरू!

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। निगम का वह सॉफ्टवेयर, जिसमें शहर की हर छोटी-बड़ी संपत्ति और जलकर का लेखा-जोखा है, एक बार फिर ‘खतरे’ में है। सूत्रों के मुताबिक, निगम के गलियारों में हलचल है क्योंकि अफसरों ने गुपचुप तरीके से अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि “अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड तुरंत बदल लें, क्योंकि सॉफ्टवेयर पर मैलवेयर अटैक हुआ है!”
इस एक निर्देश ने न केवल सिस्टम की सुरक्षा की पोल खोल दी है, बल्कि उन घोटालेबाजों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है जो “डाटा गायब” होने की आड़ में अमानत में खयानत करने के मौके तलाश रहे हैं।
वर्तमान संकट : पासवर्ड तक नहीं बदल पा रहे अधिकारी !
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ पासवर्ड बदलने के निर्देश हैं, तो दूसरी तरफ खबर है कि टीसी (TC) और जिम्मेदार अधिकारी चाहकर भी एक या दो कोशिशें में अपना पासवर्ड नहीं बदल पा रहे हैं क्योंकि इस प्रक्रिया में error का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा भी सॉफ्टवेयर में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं :
- जिन करदाताओं ने टैक्स जमा कर दिया है, उनका भी पुराना बकाया शो हो रहा है।
- सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण रसीदें अपडेट नहीं हो रही हैं।
- जनता के लिए चेतावनी : अपने संपत्तिकर और जलकर की रसीदें संभालकर रखें, वरना कल निगम कह देगा कि आपका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है !
फ्लैशबैक – कैंप की कमाई पर भी ‘डाका ‘: दबा ली गई भारी रकम !
घोटालेबाजी का यह खेल केवल रैनसमवेयर तक सीमित नहीं है। विश्वस्त सूत्रों से एक खबर सामने आ रही है कि 9 दिसंबर 2023 को आयोजित किए गए संपत्तिकर कैंप (लोक अदालत) में जो मोटी रकम जनता से वसूली गई थी, उसका एक बड़ा हिस्सा आज तक नगर निगम के मुख्य खाते में जमा ही नहीं किया गया। साफ है कि कैंप के नाम पर वसूली तो की गई, लेकिन वह पैसा विकास कार्यों में लगने के बजाय भ्रष्टाचारियों की जेबों में चला गया। रैनसमवेयर अटैक के बहाने पुराने घपलों को दबाने की यह एक सोची-समझी साजिश जान पड़ती है।
21 दिसंबर 2023 का वो ‘करोड़ों का काला खेल ‘
यह डर बेवजह नहीं है। पिछले साल 21 दिसंबर को जब ‘ई-नगर पालिका’ सॉफ्टवेयर हैक हुआ था, तो निगम की आपदा कुछ लोगों के लिए अवसर बन गई थी। उस दौरान :
- 1 करोड़ की चपत : 20 दिसंबर को वसूला गया टैक्स निगम के खाते में पहुँचा ही नहीं। घोटालेबाजों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ‘डाटा उड़ गया’।
- 44 वार्डों का रहस्य : 66 में से सिर्फ 22 वार्डों की रकम जमा हुई। ग्रामीण विधानसभा के वार्डों का तो नामोनिशान तक नहीं था।
- मजाक बना ‘ऑडिट ‘ : डबल एंट्री सिस्टम होने के बावजूद आज तक उस गबन की जांच या ऑडिट नहीं हुई।
सवाल यह है कि जब जनता ने टैक्स चुकाया और रसीद कटी, तो 9 महीने बाद “अनुमानित रकम” लिखकर पैसा क्यों जमा किया गया? क्या सरकारी मुलाजिम जनता का पैसा महीनों अपनी जेब में रख सकते हैं ?

PIN के हाथ लगी बैंकिंग रिपोर्ट ने खोली पोल
‘PIN’ के हाथ लगी 20 दिसंबर 2023 की बैंकिंग रिपोर्ट चीख-चीख कर घोटाले की गवाही दे रही है। दस्तावेज साफ बताते हैं कि किस तरह विकास कार्यों में लगने वाला पैसा भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ गया। अब फिर से सॉफ्टवेयर पर मैलवेयर अटैक की खबरें हैं, तो सवाल खड़ा होता है कि क्या इस बार भी ‘डाटा डिलीट’ होने का बहाना बनाकर करोड़ों के राजस्व की बंदरबांट होगी ?
निगम प्रशासन की चुप्पी और सॉफ्टवेयर की बदहाली यह बताने के लिए काफी है कि शहर की जनता के टैक्स की सुरक्षा के इंतेजामत फिलहाल कमजोर हैं !




