GRMC के न्यूरोसर्जरी विभाग ने देश को दिए 61 विशेषज्ञ, विश्व न्यूरोसर्जन दिवस पर गरिमामय आयोजन

ब्यूरो रिपोर्ट , ग्वालियर। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (GRMC) का न्यूरोसर्जरी विभाग न केवल मध्य भारत का सबसे पुराना केंद्र है, बल्कि यह देश के चिकित्सा क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्व न्यूरोसर्जन दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में विभाग प्रमुख डॉ. अविनाश शर्मा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि अब तक इस संस्थान से 61 न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ प्रशिक्षित होकर देशभर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आधुनिक न्यूरोसर्जरी के जनक डॉ. हार्वे कुशिंग को किया याद
8 अप्रैल (बुधवार) को आधुनिक न्यूरोसर्जरी के जनक डॉ. हार्वे कुशिंग की जयंती के उपलक्ष्य में न्यूरोसर्जरी विभाग के सेमिनार हॉल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अविनाश शर्मा ने डॉ. कुशिंग के जीवन, उनके शोध और न्यूरोसर्जरी को एक स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला।
एक सफल न्यूरोसर्जन के लिए 4 मूल मंत्र
डॉ. शर्मा ने पीजी छात्रों और युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए सफलता के चार स्तंभों के बारे में बताया:
- स्वयं के प्रति पूर्ण ईमानदारी।
- मरीजों के प्रति संवेदनशीलता।
- उचित डॉक्यूमेंटेशन एवं कानूनी समझ।
- कठिन परिश्रम, धैर्य एवं अटूट समर्पण।

युवा डॉक्टरों को आगे बढ़ानी होगी विरासत- डॉ. शुक्ला
कार्यक्रम के दौरान प्रो. डॉ. अवधेश शुक्ला ने विभाग के गौरवशाली इतिहास पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ग्वालियर का यह विभाग वर्षों से विशेषज्ञ तैयार कर रहा है और अब यह जिम्मेदारी युवा चिकित्सकों के कंधों पर है कि वे इस विरासत को और आगे ले जाएं। वर्तमान में विभाग में प्रतिवर्ष 8 न्यूरोसर्जन प्रशिक्षित किए जा रहे हैं।
वरिष्ठ चिकित्सकों की उपस्थिति से गरिमामय हुआ आयोजन
कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के प्रमुख और विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
- प्रो. डॉ. दिनेश उदैनिया (विभागाध्यक्ष, न्यूरोमेडिसिन)
- प्रो. डॉ. आदित्य श्रीवास्तव
- डॉ. अरविंद गुप्ता
- डॉ. आनंद शर्मा
- डॉ. विवेक कनकने
कार्यक्रम का संचालन और अतिथियों का स्वागत न्यूरोसर्जरी विभाग के रेजिडेंट्स द्वारा किया गया। इस अवसर पर नर्सिंग स्टाफ, ओटी टेक्नीशियन्स और विभिन्न विभागों के रेजिडेंट डॉक्टर्स भी मौजूद रहे।




