जनता की सुरक्षा दांव पर ? MP में चेकपोस्ट बंद होने से हाईवे पर बढ़ेगा ओवरलोड वाहनों का ‘तांडव’

“आपकी सुरक्षा या उनका मुनाफा ? एमपी के चेकपोस्ट हटने से ओवरलोड वाहनों को मिली ‘ग्रीन चिट’। अब टूटी सड़कें और भीषण हादसे होंगे जनता की तकदीर, क्योंकि सिस्टम ने खोल दिए हैं “सिंडिकेट” के लिए दरवाजे !”
@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के नवनियुक्त परिवहन कमिश्नर (TC) उमेश जोगा ने पदभार संभालते ही एक ऐसा विवादित फैसला लिया है, जिसने प्रदेश की जनता और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जोगा ने तत्काल प्रभाव से प्रदेश की सीमाओं पर स्थित सभी परिवहन चेकपोस्ट बंद करने का फरमान जारी किया है। शासन भले ही इसे ‘सुगम यातायात’ का नाम दे, लेकिन हकीकत में यह फैसला आम आदमी की जान और सरकारी खजाने, दोनों के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
सिंडिकेट का ‘सर्कल’ और ट्रांसपोर्टर का मुनाफा
सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि परिवहन चेकपोस्ट बंद करने की यह घोषणा सीधे तौर पर बड़े ट्रांसपोर्टरों और ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट को लाभ पहुँचाने के लिए की गई है। महकमे में सुगबुगाहट है कि रसूखदार ट्रांसपोर्ट लॉबी के दबाव में आकर यह ‘राहत’ दी गई है। गौरतलब है कि उमेश जोगा अपने पिछले कार्यकाल में भी इसी तरह के फैसलों को लेकर चर्चा में रहे थे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या जनता के हितों से ऊपर सिंडिकेट का मुनाफा है ?
सरकारी खजाने पर असर, “फंड की कमी” के राग को मिलेगा बल
चेकपोस्ट बंद होने का सबसे पहला और बड़ा असर राजस्व (Revenue) पर पड़ेगा। परिवहन विभाग को बॉर्डर टैक्स और जुर्माने से मिलने वाले करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। राजस्व की यह हानि अंततः आम जनता को ही भुगतनी होगी, क्योंकि जन-कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए फंड की कमी होगी। बिना निगरानी के गाड़ियां गुजरेंगी, जिससे शासन को मिलने वाला लीगल टैक्स भी सिंडिकेट की जेब में जाएगा।
ओवरलोडिंग और सड़कों की बदहाली पर कैसे लगेगी लगाम ?
चेकपोस्ट हटने से अब हाईवे पर ओवरलोड वाहनों को खुली छूट मिल गई है। बिना किसी रोक-टोक के क्षमता से अधिक वजन लेकर दौड़ने वाले ये ट्रक न केवल सड़कों को समय से पहले जर्जर कर देंगे, बल्कि हाईवे पर चलने वाली आम जनता की गाड़ियों के लिए भी ‘चलते-फिरते काल’ साबित होंगे। ओवरलोडिंग के कारण होने वाली भीषण दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ना अब लगभग तय माना जा रहा है।
चेकपोस्ट बंद होने से जनता के सामने बड़े खतरे
- सुरक्षा में बड़ी सेंध : बॉर्डर चेकपोस्ट अवैध शराब, नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी रोकने में ‘फिल्टर’ का काम करते थे। अब बिना किसी जांच के बाहरी राज्यों के संदिग्ध वाहन प्रदेश की सीमा में बेरोकटोक प्रवेश करेंगे।
- प्रदूषण और कंडम वाहनों की भीड़ : चेकपोस्ट पर वाहनों की फिटनेस और पीयूसी (PUC) की जांच होती थी। अब धुआं उड़ाते और अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ेंगे, जिससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान होगा।
- ईमानदार बनाम सिंडिकेट : नियम मानने वाले छोटे ट्रांसपोर्टरों के लिए अब धंधा करना मुश्किल होगा, क्योंकि सिंडिकेट बिना टैक्स भरे कम दाम में माल ढोएगा, जिससे बाजार में असमानता पैदा होगी।
- अपराधियों को ‘एग्जिट रूट’ : पुलिस और प्रशासन के लिए अपराधियों की घेराबंदी करना मुश्किल होगा, क्योंकि सीमाओं पर निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं बचेगी।
निष्कर्ष : परिवहन आयुक्त के इस “उदार” फैसले ने प्रदेश की सीमाओं को असुरक्षित और हाईवे को खतरनाक बना दिया है। एक ओर जहाँ शासन, अक्सर राजस्व की कमी का राग अलापता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे फैसले सीधे तौर पर सिंडिकेट को फलने-फूलने का मौका दे रहे हैं।




