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सावधान जनता! अवैध फैक्ट्रियों में कहीं आपके बच्चों के लिए ‘जहर’ तो नहीं बन रहीं ये टॉफियां? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्र से मचा हड़कंप

गिरवाई की 6 फैक्ट्रियों का काला चिट्ठा: कैडबरी जैसे बड़े ब्रांडों से मिलती-जुलती पैकिंग में बेच रहे बच्चों की टाॅफी और चॉकलेट। प्रदूषण बोर्ड ने माना "पानी तक में घुल रहा जहर"। प्रशासन की सुस्ती और मालिकों की गुंडई का संगम

अंशुल मित्तल, ग्वालियर। शहर के गिरवाई क्षेत्र (ए.बी. रोड) से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो न केवल जनता की सेहत से खिलवाड़ है, बल्कि शासन-प्रशासन के इकबाल को सीधी चुनौती है। यहाँ की 6 बड़ी औद्योगिक इकाइयां बिना किसी वैध अनुमति के ‘जहर’ उगल रही हैं। हद तो तब हो गई जब कार्रवाई के डर के बजाय एक फैक्ट्री मालिक ने सरेआम सिस्टम को चुनौती देते हुए कहा- “बंद करवा दो मेरी फैक्ट्री!”

मुनाफाखोरों की दबंगई और मासूमों की सेहत

गिरवाई स्थित मुस्कान फैक्ट्री (किंग कन्फेक्शनरी), महालक्ष्मी च्यु, बालाजी इण्डस्ट्रीज, अमन फूड्स और तिल्ली मिल (कैलाश इण्डस्ट्रीज) जैसी इकाइयां बिना सक्षम मंजूरियों के धड़ल्ले से काम कर रही हैं और नियमों को पैरों तले रौंद रही हैं।

  • ​जहरीली कैंडी का जाल : ‘किंग कन्फेक्शनरी’ जैसी जगहों पर बच्चों के लिए टॉफियां और खाने का सामान तैयार हो रहा है, लेकिन इनके पास प्रदूषण बोर्ड की अनिवार्य अनुमति (Consent) तक नहीं है। बिना मानकों के तैयार ये उत्पाद बच्चों के लिवर और सेहत के लिए ‘धीमा जहर’ साबित हो सकते हैं।
  • तिल्ली मिल मालिक की हेकड़ी : जब इन अवैध गतिविधियों पर सवाल उठे, तो तिल्ली मिल (कैलाश इण्डस्ट्रीज) के मालिक ने अपनी ऊंची पहुंच का धौंस दिखाते हुए प्रशासनिक तंत्र को ही चुनौती दे डाली। मालिक का यह कहना कि “बंद करवा दो मेरी फैक्ट्री”, साफ दर्शाता है कि इन रसूखदारों को न तो कानून का डर है और न ही जनता की जान की परवाह।

कुंभकर्णी नींद से जागा प्रदूषण बोर्ड, नगर निगम को लिखा पत्र

​हैरानी की बात यह है कि ये फैक्ट्रियां सालों से वायु और जल प्रदूषण अधिनियमों की धज्जियां उड़ा रही थीं, लेकिन ग्वालियर का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम ‘अंधा’ बना बैठा था। जब जागरूक नागरिकों ने शिकायतों की झड़ी लगा दी और मामला भोपाल तक गरमाया, तब जाकर विभाग ने जांच की खानापूर्ति करते हुए नगर निगम के पाले में गेंद डाल दी ।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का निगम को पत्र।

 प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड से ये पांच कड़वे और सीधे सवाल :

  1. क्या प्रशासन कमजोर है ? तिल्ली मिल मालिक ने  कहा “बंद करवा दो मेरी फैक्ट्री”, क्या प्रशासन इस अहंकार को चुनौती मानकर तत्काल ताला लटकाएगा या फिर ‘जांच’ के नाम पर फाइल दबा दी जाएगी?
  2. बच्चों की जान की कीमत क्या है? बिना अनुमति बन रही टॉफियों और कैंडी की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है? अगर कल कोई मासूम बीमार पड़ता है, तो क्या फैक्ट्री मालिक और लापरवाह अधिकारी जेल जाएंगे?
  3. ​निगम की नाक के नीचे ये ‘खेल’ कैसे ? नगर निगम सीमा में इतनी बड़ी इकाइयां बिना NOC के कैसे चल रही थीं ? क्या संबंधित वार्ड के अधिकारियों और फैक्ट्री मालिकों के बीच कोई ‘गुपचुप’ डील चल रही थी ?
  4. शिकायत का इंतजार क्यों? क्या प्रदूषण बोर्ड का काम सिर्फ दफ्तर में बैठना है? जब तक जनता सीएम हेल्पलाइन पर गुहार न लगाए, तब तक विभाग को हवा और पानी में घुलता जहर क्यों नहीं दिखता ?
  5. 15 दिन का मोहलत क्यों? जब यह साफ हो चुका है कि ये इकाइयां अवैध हैं और नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, तो इन्हें 15 दिन का और समय देकर क्या साक्ष्यों को मिटाने या ‘सेटिंग’ करने का अवसर दिया जा रहा है ?

“नोटिस-नोटिस” खेलना बंद कर, जनता की भी सोच लो साहब “

शहर की जनता अब केवल ‘नोटिस’ नहीं, बल्कि इन जहरीली इकाइयों पर तालाबंदी और भारी जुर्माने की मांग करती है। जो की जनता का अधिकार है क्योंकि इन फैक्ट्री में बन रही टाॅफियां और फूड प्रोडक्ट्स खुलेआम बिक रहे हैं। यह अमानक प्रोडक्ट्स मासूम बच्चों और आम आदमी के लिए जहर बन रहे हैं। क्या प्रशासन में इतना दम नहीं है कि नोटिस-नोटिस का खेल बंद करें और जहर उगल रही फैक्ट्रियों पर लगाम लगाए ?

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