CAG रिपोर्ट के बाद “अलर्ट मोड” में प्रशासन: साढ़े 4 करोड़ की सरकारी जमीन से हटाया कब्जा
अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल, सरकारी नालों पर कब्जे, मंजूरी के विरुद्ध रिसॉर्ट और अस्पतालों के निर्माण जैसे कई खुलासे कैग रिपोर्ट में हुए हैं । इसके बाद T&CP के साथ नगर निगम के जिम्मेदारों पर भी सीधा सवाल खड़ा है "लापरवाही या मिलीभगत" ?

ग्वालियर। जिले में सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। गुरुवार को कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देशन में राजस्व, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने शहर के नजदीकी दो अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान लगभग 15 हजार वर्गफीट बेशकीमती जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, जिसकी बाजारू कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। अतिक्रमण के विरोध में कुछ दिनों से लगातार हो रही प्रशासनिक कार्रवाइयों को कैग रिपोर्ट से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

इन क्षेत्रों में हुई बड़ी कार्रवाई
एसडीएम झांसी रोड, अतुल सिंह के नेतृत्व में प्रशासन ने दो प्रमुख स्थानों पर बुलडोजर चलाया :
ग्राम रमौआ : यहाँ सर्वे क्रमांक-71 की 10 हजार वर्गफुट जमीन पर ‘जेतल विहार कंस्ट्रक्शन’ के डायरेक्टर वीरेंद्र गुप्ता ने पार्क की बाउंड्री बनाकर कब्जा कर लिया था। तहसीलदार सिटी सेंटर द्वारा बेदखली आदेश और 20 हजार रुपए के जुर्माने के बाद गुरुवार को इस अवैध ढांचे को ढहा दिया गया।
ग्राम डोंगरपुर : यहाँ सर्वे क्रमांक-187 की 5 हजार वर्गफुट जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध पार्क बना रखा था। प्रशासन ने यहाँ से भी कब्जा हटाया और संबंधितों पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया।
CAG रिपोर्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन

सरकारी जमीनों पर हो रही इस कार्रवाई को हाल ही में आई कैग (CAG) रिपोर्ट से जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि कैग रिपोर्ट में ग्वालियर में अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल, सरकारी नालों पर कब्जों और बेशकीमती जमीनों के अतिक्रमण को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से ही जिला प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है, जिसका असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है।
सवालों के घेरे में ‘टाउन एंड कंट्री प्लानिंग’
भले ही प्रशासन अभी अतिक्रमण हटाने में मुस्तैदी दिखा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है। कैग रिपोर्ट में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग की गंभीर लापरवाहियों और अनदेखियों का भी कच्चा चिट्ठा खोला गया है।
”विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अतिक्रमण हटाना काफी नहीं है। सवाल यह है कि जिन अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध कॉलोनियां बसीं और सरकारी नालों पर कब्जे हुए, उन पर कार्रवाई कब होगी? क्या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?”
फिलहाल, कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में यह विशेष मुहिम जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े भू-माफियाओं पर गाज गिर सकती है।




