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नगर निगम में ‘स्वच्छता का शंखनाद’: जब साहबों ने खुद थामी झाड़ू, बदली मुख्यालय की सूरत

स्वच्छ कार्यालय, बेहतर सेवा का आधार- निगमायुक्त

ग्वालियर |अक्सर फाइलों और बैठकों में व्यस्त रहने वाले ग्वालियर नगर निगम के आला अधिकारी शनिवार को एक अलग ही अंदाज़ में नज़र आए। स्वच्छ भारत अभियान को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर, निगम मुख्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक श्रमदान के जरिए स्वच्छता की एक नई इबारत लिखी। शनिवार की सुबह मुख्यालय का नज़ारा बदला हुआ था—जहाँ सफाई कर्मचारी तैनात होते थे, वहाँ आज वरिष्ठ अधिकारी झाड़ू और फावड़े थामे पसीना बहा रहे थे।

स्वयं झाडू थाम, ऑफिस की सफाई करते उपायुक्त मुकेश बंसल

कुर्सी छोड़ मैदान में उतरे दिग्गज

​नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय के निर्देशन और अपर आयुक्त श्री टी. प्रतीक राव के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान ने टीम भावना की अनूठी मिसाल पेश की। इस ‘सफाई यज्ञ’ में अपर आयुक्त श्री प्रदीप सिंह तोमर, श्री मुनीश सिंह सिकरवार, उपायुक्त श्री सुनील सिंह चौहान और श्री मुकेश बंसल सहित निगम के तमाम विभागों के अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की।

कोने-कोने से निकाला गया कचरा

अभियान की शुरुआत मुख्यालय के भीतर से हुई। अधिकारियों ने अपने-अपने कक्षों में जमा पुराने कागजों के ढेर हटाए, फर्श की सफाई की और अनावश्यक सामान को बाहर निकाला।

  • इंडोर सफाई: फाइलों का व्यवस्थित प्रबंधन और ऑफिसों का कायाकल्प।
  • आउटडोर प्रयास: गार्डन एरिया में पेड़-पौधों की छंटाई की गई और सूखी टहनियों व मलबे को साफ किया गया।
  • टीम स्पिरिट: वरिष्ठ अधिकारियों को खुद सफाई करते देख निचले स्तर के कर्मचारियों में भी जबरदस्त उत्साह दिखा।

​”स्वच्छ कार्यालय ही बेहतर सेवा का आधार है। जब हम खुद उदाहरण पेश करते हैं, तो वह समाज और कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा संदेश होता है। स्वच्छता कोई कार्य नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी है।”

संघ प्रिय,आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर

स्वच्छ सर्वेक्षण की ओर मजबूत कदम

​ग्वालियर को स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 में शीर्ष रैंकिंग दिलाने की दिशा में इसे एक मनोवैज्ञानिक जीत माना जा रहा है। अधिकारियों के इस जज्बे ने यह साफ कर दिया है कि ग्वालियर अब केवल सफाई करवाएगा नहीं, बल्कि स्वच्छता को अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाएगा।

पार्क पर्यवेक्षक राजकुमार नागर ने भी, स्वयं संभाला सफाई का जिम्मा

अभियान के अंत में पूरा परिसर न केवल चमकदार नज़र आया, बल्कि कर्मचारियों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार भी हुआ। नगर निगम की इस पहल की शहर भर में चर्चा है और यह अन्य सरकारी विभागों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बनकर उभरा है।

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