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निगम परिषद : पार्षद ने उठाये संगीन घोटाले पर सवाल, जल्द बड़ी कार्रवाई की आशंका

गौशाला के विषय पर सभापति ने दिए निर्देश, गार्बेज शुल्क का मुद्दा भी सॉल्व

सोमवार को निगम परिषद की बैठक के शुरुआती दौर में ही विपक्ष के साथ सत्तापक्ष के पार्षद भी निगम अफसरों से नाराज दिखे। वार्ड 38 के पार्षद ने कहा कि ‘निगम ने 15वें वित्त आयोग के तहत मिले पैसे से, रोड स्वाइप मशीनें खरीदीं ,10 करोड़ रुपए खर्च किए। उद्देश्य था कि शहर को डस्ट फ्री किया जाएगा’। इसके बावजूद शहर डस्ट फ्री क्यों नहीं हुआ ?

“मंत्री की कही मानते हैं अफसर”- सत्तापक्ष

सत्तापक्ष के पार्षदों का आरोप था कि निगम अफसर केवल मंत्री के कहने पर विकास कार्य करा रहे हैं, यह पार्षदों का अपमान है। भाजपा के पार्षदों ने इस आरोप को सिरे से नकारते हुए तर्क दिया कि ‘महापौर तो आपकी हैं, आपको विकास करने से किसने रोका है ?


पार्षद के सवाल पर….

भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास का सवाल था कि विभिन्न मदों में किये जा रहे खर्चों संबंधी, चाही गई जानकारी पार्षदों से छुपाई जाती है या गोलमोल जवाब दिए जाते हैं।

कमिश्नर ने मजबूती से रखा पक्ष

निगमायुक्त संघ प्रिय ने मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कई मामलों में, चाही गई जानकारियां विस्तृत स्वरूप की होती हैं, इसीलिए जानकारी देने में समय लग सकता है। यदि सदस्य डेट वाइज जानकारी मांगेंगे, तो हमें भी जानकारी देने में आसानी होगी। इसके अलावा आपके द्वारा चाही गई जानकारी आपको प्राथमिकता से उपलब्ध कराई जाएंगी।


पार्षद के सवाल से, निगम के फर्जी आईडी घोटाले पर सधा निशाना

भाजपा पार्षद नागेंद्र राणा के एक सवाल से निगम के फर्जी संपत्तिकर आईडी घोटाले की चर्चा हो पड़ी। जिसमें दोषी पाए गए, संविदाकर्मी को अभयदान देते हुए, केवल संपत्ति कर विभाग से हटाया गया है। दरअसल भाजपा पार्षद नाम मुद्दा उठाया था कि क्षेत्र में हो रहे GIS सर्वे की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। इसके अलावा इस सर्वे के तहत नागरिकों को दिसंबर में दिए जा रहे नोटिसों पर, पूर्व उपायुक्त एपीएस भदौरिया के हस्ताक्षर हैं, जो कि पहले ही रिटायर हो चुके हैं। निगम आयुक्त ने कहा कि यह त्रुटि किस वजह से हुई है इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


पार्षद ने सर्वे पर भी उठाए सवाल

पार्षद नागेंद्र राणा का कहना था कि जीआईएस सर्वे के तहत किन संपत्तियों की आईडी बनाई जा रही है यह बताया जाए। क्योंकि वर्तमान में मंदिर, मस्जिद और शौचालयों समेत ऐसी संपत्तियों की भी आईडी बनी हैं जोकि टैक्स फ्री होती है। इन्हीं आईडी में संशोधन कर, फर्जी आईडी घोटाले को अंजाम दिया जाता है। पार्षद ने ऐसे ही मामलों में दोषी पाए गए, संविदाकर्मी का भी जिक्र किया।

नेता प्रतिपक्ष बोले- संपत्तियों के सर्वे कराई जाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि ‘ऐसा ही एक सर्वे वर्ष 2009 के आसपास भी कराया गया था उसका क्या हुआ ? उसकी जानकारी भी सदन को दी जाए।’


सभापति ने सख्त होकर मांगे जवाब

सदन में हुई गर्मागर्मी के बाद सभापति ने सख्त होते हुए कहा कि निगम के अफसर अपने ही आदेशों को याद नहीं रखते। सभापति ने याद दिलाया कि वर्षा के समय में नालों से अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गठित कर, आदेश जारी किया गया था। अब उस आदेश का क्या हुआ कितने नालों से अतिक्रमण हटाया गया ?


सभापति के निर्देश:

  • ग्वालियर इकलौता ऐसा शहर है जहां निगम की ओर से गौशाला संचालित की जा रही है। कमिश्नर, गौशाला पर किए जा रहे समस्त खर्चों की जानकारी उपलब्ध कराएं।
  • सदन के सदस्यों को चाही गई जानकारी समय से उपलब्ध कराई जाए।
  • गार्बेज शुल्क की दरों को रिवाइस कर ने के संबंध में नेता प्रतिपक्ष के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया।

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