जिला अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: अब ब्लड बैंक में शुरू हुई ब्लड कंपोनेंट सुविधा। सरकारी दावा- मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा बाहर

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ग्वालियर जिला अस्पताल (मुरार) ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अब ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन (Blood Component Separation) की व्यवस्था रविवार से विधिवत शुरू कर दी गई है।
अब मरीजों को केवल ‘होल ब्लड’ पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि उनकी जरूरत के अनुसार रक्त के अलग-अलग घटक उपलब्ध हो सकेंगे।

इन बीमारियों के मरीजों को मिलेगा जीवनदान
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सचिन श्रीवास्तव और सिविल सर्जन डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि इस अत्याधुनिक सुविधा का सबसे अधिक लाभ निम्नलिखित मरीजों को मिलेगा:
- एनीमिया और थैलेसीमिया : इन मरीजों को अब सीधे ‘पैक्ड आरबीसी’ (PRBC) मिल सकेगी।
- डेंगू और प्लेटलेट्स की कमी : प्लेटलेट सांद्रण (Platelets) की सुविधा अब अस्पताल में ही उपलब्ध होगी।
- हीमोफिलिया और ब्लीडिंग डिसऑर्डर : क्लॉटिंग फैक्टर्स के लिए FFP और क्रायोप्रेसिपिटेट की सुविधा मिलेगी।
कैसे काम करती है यह तकनीक ?
ब्लड बैंक में स्थापित की गई रेफ्रिजेरेटेड सेंट्रीफ्यूज (Refrigerated Centrifuge) मशीन के जरिए पूरे रक्त (Whole Blood) को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया जाता है। यह प्रक्रिया बेहद सटीक तापमान (2-6°C या 22°C) पर की जाती है।
अब उपलब्ध हो सकेंगे ब्लड के यह कॉम्पोनेंट्स :
- PRBC (पैक्ड आरबीसी) : लाल रक्त कोशिकाओं का सांद्रण।
- Platelets (प्लेटलेट्स) : प्लेटलेट्स की कमी दूर करने हेतु।
- FFP (फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा) : रक्त का थक्का जमाने वाले कारकों से भरपूर।
- Cryoprecipitate (क्रायोप्रेसिपिटेट) : फाइब्रिनोजेन और फैक्टर VIII की उच्च सांद्रता।
पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रक्रिया
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ब्लड संग्रह के लिए क्वाड्रीपल (Quadruple) बैग का उपयोग किया जा रहा है। सेंट्रीफ्यूजेशन मशीन में ‘हल्के स्पिन’ और ‘भारी स्पिन’ के जरिए रक्त के घटकों को अलग किया जाता है। इसके बाद इन्हें वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सुरक्षित स्टोर किया जाता है :
- PRBC : 2-6°C पर।
- FFP/Cryo : -20°C या उससे कम तापमान पर।
”अब तक जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को कंपोनेंट्स के लिए निजी ब्लड बैंकों या अन्य शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। इस व्यवस्था के शुरू होने से न केवल समय बचेगा, बल्कि मरीजों को किफायती और समय पर इलाज मिल सकेगा।”
डॉ. राजेश शर्मा, सिविल सर्जन, ग्वालियर




