दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों के मानदेय में वृद्धि, लेकिन क्या ₹9 की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा है ?

ग्वालियर। जिला प्रशासन ने ग्वालियर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों के लिए नई दरें घोषित कर दी हैं। कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से श्रमिकों के मानदेय में वृद्धि की गई है। हालांकि, यह बढ़ोतरी महंगाई के दौर में कितनी राहत देगी, इसे लेकर अब चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

वेतन में मामूली इजाफा: आंकड़ों की नज़र से
प्रशासन ने महंगाई भत्ते (VDA) में संशोधन किया है, जिससे हर श्रेणी के श्रमिक के दैनिक वेतन में मात्र ₹9 की वृद्धि हुई है :
पुरानी दरें (31 मार्च 2026 तक):
- अकुशल : ₹405 प्रतिदिन
- अर्द्धकुशल : ₹438 प्रतिदिन
- कुशल : ₹496 प्रतिदिन
- उच्च कुशल : ₹550 प्रतिदिन
नई दरें (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी):
- अकुशल : ₹414 प्रतिदिन
- अर्द्धकुशल : ₹447 प्रतिदिन
- कुशल : ₹505 प्रतिदिन
- उच्च कुशल : ₹559 प्रतिदिन
घोषणा अच्छी, पर “सुधार” की भी दरकार
प्रशासन के इस कदम को जहां एक ओर नियमित प्रक्रिया माना जा रहा है, वहीं इसके कुछ चिंताजनक पहलू भी सामने आ रहे हैं :
- महंगाई के मुकाबले नाममात्र की वृद्धि : जानकारों का मानना है कि जिस रफ्तार से पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं, उसके मुकाबले ₹9 प्रतिदिन (₹275 प्रति माह) की वृद्धि बहुत कम है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
- भुगतान में देरी की समस्या : प्रशासन दरें तो बढ़ा देता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई विभागों में आउटसोर्स और दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को महीनों तक वेतन नहीं मिलता। नई दरें कागजों पर तो लागू हो जाती हैं, पर उनका लाभ श्रमिक की जेब तक पहुंचने में लंबा वक्त लग जाता है।
- साप्ताहिक अवकाश का उल्लंघन : आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि साप्ताहिक अवकाश का पैसा नहीं काटा जाएगा (Paid Off), लेकिन जमीनी स्तर पर कई ठेकेदार और छोटे विभाग अभी भी संडे या छुट्टी के दिन का पैसा काट लेते हैं, जिसकी निगरानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
कलेक्टर कार्यालय के अनुसार, यह दरें श्रम आयुक्त मध्य प्रदेश शासन की अधिसूचना के आधार पर निर्धारित की गई हैं। आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी श्रमिक के मासिक वेतन से साप्ताहिक अवकाश की कटौती नहीं की जाएगी। अब देखना यह होगा कि इन निर्धारित दरों का सख्ती से पालन हो पाता है या नहीं ?




