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VIDEO: KRH की ‘जानलेवा’ लापरवाही! महिला के पेट में 18 महीने तक रही सर्जिकल कैंची, अब रिटायरमेंट की आड़ में डॉक्टर झाड़ रहीं पल्ला

मरीज की जान आफत में, पति का छूटा रोजगार; न्याय की गुहार लेकर अदालत की चौखट पर पहुंचा पीड़ित परिवार

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर । चिकित्सा के मंदिर कहे जाने वाले अस्पताल से लापरवाही का एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (KRH) में ओवरी सिस्ट का ऑपरेशन कराने आई एक गरीब महिला के पेट में वरिष्ठ डॉक्टर ने ‘सर्जिकल कैंची’ छोड़ दी। यह घातक वस्तु पूरे 18 महीने तक महिला के शरीर में रही, जिससे वह धीरे-धीरे मौत के करीब पहुँचती गई। हद तो तब हो गई जब मामले का खुलासा होने पर दोषी डॉक्टर ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय ‘रिटायरमेंट’ का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। तत्काली समय में यह मामला मीडिया की सुर्खियां रहा था। अब यह मामला न्यायालय की चौखट पर पहुँच गया है, जहाँ एक तरफ बीमार पत्नी है और दूसरी तरफ न्याय की लड़ाई में अपना रोजगार खो चुका बेबस पति।

 पूरा मामला: सिस्ट निकालने के बदले ‘कैंची’ दे दी

भिंड निवासी कमला देवी जाटव अपनी ओवरी में सिस्ट (गांठ) के इलाज के लिए KRH ग्वालियर आई थीं। 20 फरवरी 2023 को शहर की जानी-मानी महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. उर्मिला त्रिपाठी ने उनका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन तो सफल बताया गया, लेकिन डॉक्टर अपना एक मुख्य औजार (कैंची) मरीज के पेट में ही भूल गईं।

​ 14 दिन तक भर्ती रही, पर किसी को भनक नहीं:

ऑपरेशन के बाद महिला 6 मार्च 2023 तक अस्पताल में भर्ती रही। हैरानी की बात यह है कि सर्जिकल किट से एक इंस्ट्रूमेंट कम होने के बावजूद न तो डॉक्टर ने और न ही स्टाफ ने इसकी सुध ली।

18 महीने का नरक और चौंकाने वाला खुलासा

डिस्चार्ज के बाद कमला देवी की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती गई। पेट में तेज दर्द और शरीर में लगातार आती कमजोरी के कारण परिवार दर-दर भटकता रहा। अंततः नवंबर 2024 में जब भिंड में एक एक्स-रे कराया गया, तो डॉक्टर और परिजन दोनों के होश उड़ गए। एक्स-रे रिपोर्ट में महिला के पेट के भीतर एक बड़ी कैंची साफ नजर आ रही थी।

नवंबर 2024 में भिंड के सरकारी अस्पताल में कराया गया एक्स-रे, जिसमें दिख रही शरीर के अंदर कैंची

गलती छुपाने के लिए दोबारा ऑपरेशन और ‘दस्तावेजों की हेराफेरी’

मामला खुलते ही महिला को दोबारा KRH रेफर किया गया। 30 नवंबर 2024 को डॉ. राजेश प्रजापति ने ऑपरेशन कर कैंची तो बाहर निकाल ली, लेकिन आरोपों के मुताबिक:

  • पीड़ित परिवार को वह कैंची नहीं दिखाई गई।
  • दूसरे ऑपरेशन से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज छुपा लिए गए।
  • ​बिना किसी मुआवजे या माफी के मरीज को उसके हाल पर छोड़ दिया गया।

 तबाही के कगार पर गरीब परिवार

​इस लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर ला दिया है!

  • स्वास्थ्य: पीड़िता की हालत अभी भी नाजुक है, डॉक्टर अब तीसरे ऑपरेशन की बात कह रहे हैं।
  • आर्थिक संकट: पत्नी की देखभाल के चक्कर में पति की नौकरी छूट गई है। पीड़िता का पति कस्बे में एक हलवाई की दुकान पर मामूली सी नौकरी करता था।
  • ​न्याय का इंतजार: कई बार लिखित शिकायत करने के बाद अस्पताल से कोई राहत नहीं मिली। अंततः अब पीड़ित परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

PIN द्वारा सवाल पूछे जाने पर डॉक्टर उर्मिला त्रिपाठी लगातार मामले को टालती रहीं। हालांकि हमारी टीम मामले पर नजर बनाए हुए है। जल्द ही मामले में बड़े खुलासे होने की उम्मीद है!

नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर सुनें पीड़ित परिवार की आपबीती-👇

संपादकीय कमेंट: क्या ‘रिटायरमेंट’ किसी डॉक्टर को उसकी पुरानी जानलेवा गलतियों से मुक्त कर देता है? ग्वालियर में उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करने वाले, सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का यह मामला, स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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