किन अफसरों ने किया निगम कर्मचारी को ब्लैकमेल, किसने की अवैध वसूली ? नाम खुले तो दोषियों को बचाने की कवायद तेज ! VIDEO

ग्वालियर। भोपाल से जारी पत्रों में लिखा कर्मचारी को ब्लैकमेल करने के मामले में जल्द दें रिपोर्ट। अनुकंपा नियुक्ति पर आए एक कर्मचारी के नियुक्ति संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल से भारी घोटाला सामने आया है। इस खुलासे के बाद अनुकंपा नियुक्ति देने वाले अफसरों की ईमानदारी पर सीधा प्रश्न चिन्ह लगा है। पूर्व वरिष्ठ अफसरो पर गंभीर आरोप भी लगे हैं।
दरअसल, नारायण सिंह नगर निगम में मिस्त्री के पद पर पदस्थ थे जो कि 1999 में रिटायर्ड हुए और वर्ष 2001 में उनका निधन हुआ। कर्मचारी देवानंद बरैया को मृतक कर्मचारी नारायण सिंह का पुत्र बताते हुए वर्ष 2007 में अनुकंपा नियुक्ति देते हुए, निगम में पदस्थ किया गया था।एक्टिविस्ट की शिकायतों से सामने आया कि देवानंद के पिता का नाम “लालता प्रसाद” है और लालता प्रसाद के पिता का नाम “नारायण सिंह” है। अर्थात देवानंद नारायण सिंह का ‘बेटा’ नहीं ‘पोता’ है।
पांचवी कक्षा की दो अंक सूची, दोनों में पिता का नाम अलग

शिकायतकर्ता ने बताया कि RTI के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेजों में देवानंद बरैया की दो अंक सूची सामने आईं। दोनों ही मार्कशीट के अनुसार देवानंद ने वर्ष 1996 में जीवाजीराव स्कूल से पांचवी कक्षा पास की थी। लेकिन मजे की बात यह है कि धुंधली पड़ चुकी एक मार्कशीट में देवानंद के पिता का नाम ‘नारायण सिंह’ लिखा है जबकि दूसरी मार्कशीट में पिता के नाम के स्थान पर ‘लालता प्रसाद’ लिखा हुआ साफ देखा जा सकता है। ताज्जुब की बात है कि निगम अफसरों को यह नहीं दिखा।
थाने में दर्ज है FIR
RTI से प्राप्त मार्कशीट का सत्यापन कराए जाने पर, दो में से एक मार्कशीट फर्जी पाई गई। जिस पर थाना यूनिवर्सिटी में 420 और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन पुलिस की जांच भी अभी ‘शून्य’ से शुरू होकर ‘शून्य’ तक की पहुंची है !
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री भी बनी अहम गवाह

प्रॉपर्टी की एक रजिस्ट्री भी सामने आई है। रजिस्ट्री में देवानंद बरैया और उनकी मां विक्रेता की हैसियत से विक्रय पत्र संपादित कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में भी देवानंद के पिता का नाम “लालता प्रसाद” लिखा हुआ है।
मामला खुला और देवानंद ने खोला निगम अफसरों का काला चिट्ठा
छोटे पद पर, मामूली सी तनख्वाह में नौकरी करने वाले कर्मचारी देवानंद की मुश्किलें जब बढ़ीं, तब देवानंद के द्वारा भोपाल सहित तकरीबन सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी गई।
- लपेटे में बड़े नाम : शिकायत पत्र में निगम के तत्कालीन आयुक्त पवन शर्मा, तत्कालीन अपर आयुक्त राजेश बाथम सहित अन्य अफसरों पर ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए गए हैं।
- शिकायत बनी कबूलनामा : शिकायत में तथ्यों के साथ लिखा है कि देवानंद के पिता का नाम ‘नारायण सिंह’ नहीं ‘लालता प्रसाद’ है।
- फंड के लालच में खेल : शिकायत में आरोप है कि GAD, निगम के ही लोगों ने देवानंद के फर्जी दस्तावेज बनाए और उसके दादा का फंड हड़प गए।

☝️कथित तौर पर देवानंद द्वारा की गई शिकायत के कुछ अंश आपको खबर के साथ दिखा रहे हैं।
शासन ने मांगा जवाब तो शिकायत दबाने, शपथ-पत्र को बनाया ढाल

देवानंद द्वारा की गई शिकायत भोपाल पहुंची तो सहायक संचालक ने 30 जनवरी को पत्र जारी कर, ग्वालियर निगम से जवाब मांग लिया। जिसके बाद निगम में बैठे माफियाओं के हाथ पैर फूल गए। भ्रष्टों के चेहरे बेनकाब ना हों, इस डर से शपथ-पत्र का खेल रचा गया। सूत्रों की माने तो देवानंद द्वारा की गई शिकायत को दबाने के लिए देवानंद पर दबाव डाला गया और निगम के ही एक कलाबाज ने शिकायत के खिलाफ एक शपथ-पत्र तैयार कराया ! बताया जा रहा है कि यह शपथ पत्र मुरार क्षेत्र की किन्हीं गलियों में तैयार किया गया है।
भोपाल से फिर फरमान : 10 दिन में हो दोषी नियुक्तिकर्ताओं की जांच और कार्रवाई

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक ने 6 मार्च को एक पत्र जारी कर ग्वालियर नगर निगम से फर्जी नियुक्ति के मामले में जवाब मांगा है।
निष्कर्ष : नियुक्ति के लिए जरूरी दस्तावेज में इतने पेंच होने के बाद भी, देवानंद बरैया की अनुकंपा नियुक्ति की गई। जानकारी के अनुसार देवानंद किसी ऐसे पद पर नहीं रहा जिसे “मलाईदार” पद कहा जा सके। साथ ही RTI-2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों को भी झुठलाया नहीं जा सकता। ऐसी स्थिति में भले ही शपथ-पत्र का ड्रामा रचा गया हो लेकिन कथित तौर पर देवानंद द्वारा की गई शिकायत सही दिखाई देती है। भोपाल से पत्र जारी हो चुके हैं। अब देखना है कि मामलों को दबाने में माहिर निगम के जादूगर, इस मामले को, किस मामले के नीचे दबाते हैं…।
अंशुल मित्तल की रिपोर्ट- 8770226566
नोट- यह पूरी खबर शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और vdo वर्जन के आधार पर है। VIDEO 👇🏻
मामले पर क्या कहते हैं शिकायतकर्ता विष्णु दत्त शर्मा, लिंक पर क्लिक कर देखिए (Video)



