PIN की खबर का बड़ा असर: फर्जी पदोन्नति निरस्त, वेतन वसूली के आदेश
खबर प्रकाशित करने के बाद सामने आया घोटाला, कमिश्नर ने लिया कड़ा संज्ञान

ग्वालियर। नगर निगम के बहुचर्चित ‘नीरज श्रीवास्तव फर्जी पदोन्नति कांड’ में PIN (पब्लिक इंटरेस्ट न्यूज़) की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। लोकायुक्त की तल्ख टिप्पणी और PIN द्वारा मामले को प्रमुखता से उजागर करने के बाद, निगम कमिश्नर ने मामले पर तुरंत संज्ञान लिया है। विवादित कर्मचारी का प्रमोशन निरस्त करते हुए, वेतन वसूली के कड़े आदेश जारी किये गये हैं।
PIN की खबर ने खोली फाइल, कमिश्नर ने की स्ट्राइक
नगर निगम प्रशासन ने जनवरी 2026 में जो रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपी थी, उसे लोकायुक्त ने ‘तथ्यहीन’ बताकर खारिज कर दिया था। जैसे ही PIN ने इस भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिलाई की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर संघ प्रिय ने तत्काल फाइल तलब की और अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। कमिश्नर के सख्त रुख के बाद विभाग ने आनन-फानन में नीरज श्रीवास्तव का प्रमोशन निरस्त करने की फाइल दौड़ाई। बता दें कि घालमेल से “कुशल श्रेणी” पाने वाले “अकुशल कर्मचारी” नीरज श्रीवास्तव को, सहायक नोडल जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रखा गया।
अब तक की बड़ी कार्रवाई :
प्रमोशन निरस्त : 2012 में ‘अकुशल श्रमिक’ की कैटेगरी में भर्ती हुए नीरज श्रीवास्तव को अवैध रूप से ‘कुशल श्रमिक’ बना दिया गया था। अब उन्हें वापस “अकुशल श्रमिक” की श्रेणी में रखा गया ।
वेतन वसूली : कमिश्नर के आदेश पर 2014 से अब तक दिए गए अतिरिक्त वेतन की राशि की गणना कर उसे वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
भोपाल रवानगी : कल 6 फरवरी को लोकायुक्त भोपाल में जवाब पेश करना है। इसके लिए उपायुक्त सुनील चौहान और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से संतोष शर्मा और रमेश शर्मा जरूरी दस्तावेजों और ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ के साथ भोपाल रवाना हो चुके हैं।
उपायुक्त सहित शर्मा एण्ड शर्मा की रही सराहनीय भूमिका
गौरतलब है कि पूरी कार्रवाई का मसौदा तैयार करने और भोपाल तक जवाब प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी इन तीन को सौंपी गई थी। कहा जा सकता है कि गंभीर अनियमिता के खिलाफ इस कार्रवाई में, उपायुक्त चौहान और (GAD) के संतोष शर्मा और रमेश शर्मा की भूमिका महत्वपूर्ण और सराहनीय रही है।
क्या था घोटाला जिसे PIN ने उजागर किया?
इस पूरे मामले में तकनीकी विसंगतियां और भ्रष्टाचार के स्पष्ट प्रमाण थे:
डिप्लोमा विवाद: कर्मचारी को 2014 में ही कंप्यूटर ऑपरेटर का लाभ दिया गया, जबकि उसका PGDCA डिप्लोमा 2016 में पूरा हुआ था।
राजस्व की हानि: इस गलत पदोन्नति से निगम को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति हुई है, जिसकी भरपाई अब कर्मचारी से की जाएगी।
लोकायुक्त में मामला पहुंचने और खबरों से मामला सामने आने के बाद हुई इस कार्रवाई से यह सवाल भी उपजता है कि वह कौन हैं जिन्होंने सालों तक इस मामले को दबाए रखा। लोकायुक्त अब 6 फरवरी को निगम द्वारा की गई इस नई कार्रवाई की समीक्षा करेगा।




