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निगमायुक्त ने जारी किया तबादला आदेश, विभाग में शुरू हुआ शिकवे-शिकायतों का दौर

जिला पंचायत के कई कर्मचारी, निगम पर बढ़ा रहे आर्थिक बोझ । विधि विभाग की लापरवाही भी आई सामने


निगम में जमे, पंचायत सचिव के तबादला आदेश के बाद, महकमें में गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां कर्मचारियों का एक बड़ा ग्रुप इस कोशिश में है कि कमिश्नर का यह आदेश रीवोक हो जाए । वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो कमिश्नर के आदेश को प्रक्रियागत बताते हुए आदेश की सराहना कर रहे हैं। पूरे मामले में निगम के विधि विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिसके बाद ऐसे कई मामलों की परतें भी खुल सकती हैं जिनमें निगम को, न्यायालय में शिकस्त का मुंह देखना पड़ा।

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। नगर निगम के GAD विभाग में बाबू के पद पर काम कर रहे, पंचायत सचिव संतोष शर्मा को परिषद कार्यालय भेजने का आदेश 10 फरवरी को कमिश्नर ने जारी किया। इस आदेश के बाद वर्ष 2024 का एक आदेश भी सामने आया, जिसमें पूर्व निगम कमिश्नर हर्ष सिंह ने संतोष शर्मा को जिला पंचायत वापस भेजने का आदेश जारी किया था।

विधि विभाग की लापरवाही या संरक्षण ?

2024 के तत्कालीन निगमायुक्त के आदेश के खिलाफ, संतोष शर्मा ने रिट पिटीशन क्र. 27195/2024 दायर कर, कोर्ट से स्टे ले लिया और नगर निगम में डटे रहे। नियमानुसार निगम के विधि विभाग को समय रहते इस स्टे आर्डर दिनांक 19 सितंबर 2024 को, वेकेंट कराने के लिए न्यायिक प्रक्रिया करनी थी। लेकिन विधि विभाग द्वारा यह कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण निगम कमिश्नर के आदेश के खिलाफ एक कर्मचारी को हौसला मिला और नगर निगम को अतिरिक्त वेतन खर्च उठाना पड़ा।


तत्कालीन निगमायुक्त हर्ष सिंह द्वारा 10 जुलाई 2024 को जारी पत्र में, संतोष शर्मा को वापस जिला पंचायत भेजने के मुख्य कारण स्पष्ट किए गए थे :

संविलियन प्रक्रिया खत्म होने के बाद आए

तत्कालीन कमिश्नर के आदेश में स्पष्ट था कि संतोष शर्मा ने 6 अक्टूबर 2024 को नगर निगम में अपना उपस्थिति पत्र प्रस्तुत किया। इसके पहले ही जिला पंचायत के कर्मचारियों की संविलियन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।

गांव निगम सीमा के बाहर, पंचायत सचिव निगम में कैसे ?

जिला पंचायत से नगर निगम की ओर भेजे गए संतोष शर्मा ग्राम पंचायत, डांग गुठीना के पंचायत सचिव बताए गए हैं। तत्कालीन कमिश्नर हर्ष सिंह ने अपने आदेश दिनांक 10 जुलाई 2024 में उल्लेख किया था कि नगर निगम सीमा वृद्धि में इस गांव का विलय ही नहीं किया गया। इस अनुसार संतोष शर्मा का नगर निगम में संविलियन किया जाना नियम विरुद्ध होगा।

संतोषजनक नहीं रहा संतोष का व्यवहार”

वर्णित पत्र में तत्कालीन कमिश्नर ने यह भी उल्लेख किया था कि ‘नगर निगम में कार्य करने के दौरान भी संतोष शर्मा का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा’।


पंचायत सचिव संतोष ने दी OS संतोष के खिलाफ शिकायत, लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

पंचायत सचिव संतोष शर्मा ने 11 फरवरी को भ्रष्टाचार संबंधी एक शिकायत निगम कमिश्नर सहित अन्य सक्षम अधिकारियों को भेजी है। शिकायत में निगम GAD के ऑफिस सुपरीटेंडेंट संतोष कालेकर पर कंप्यूटर खरीदी और नीलामी प्रक्रिया में गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि इस शिकायत के बारे में कहा जा रहा है कि “तबादला आदेश की नाराजगी है”। लेकिन तबादला आदेश तो कमिश्नर ने साइन किया है। संतोष शर्मा द्वारा की गई शिकायत की निष्पक्ष जांच तो बनती है।


नजरों से छिपे या छुपाए गए निगम में बैठे सहायक सचिव ?

नगर निगम सीमा वृद्धि के दौरान 27 पंचायत सचिवों को नगर निगम में दाखिल किया गया था। खबर है कि इनके पीछे-पीछे 27 सहायक सचिव भी चुपके से नगर निगम में आ गए। जानकारी के अनुसार आज तक इनका भी नगर निगम में संविलियन नहीं हुआ है। इनका वेतन निकालने की मजबूरी के कारण निगम पर बेफिजूल आर्थिक भार बढ़ रहा है। जब निगम आउटसोर्स और विनियमित कर्मचारियों से काम ले ही रहा है तो इन 27 रोजगार सहायकों पर किए जा रहे खर्च भार से निगम को तो नुकसान ही हो रहा है। फायदा आखिर किसे हो रहा है…?

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