नगर निगम में फर्जी पदोन्नति मामला; लोकायुक्त ने निगम की रिपोर्ट को बताया ‘तथ्यहीन’
6 जनवरी को निगम की ओर से तथ्यहीन जवाब मिलने के बाद लोकायुक्त ने नाराजगी व्यक्त करते हुए दोबारा जवाब प्रस्तुत करने, दिया था एक महीने का समय

ग्वालियर। नगर निगम में कर्मचारी नीरज श्रीवास्तव को नियमों के विरुद्ध ‘कुशल श्रमिक’ बनाकर लाभ पहुँचाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले में लोकायुक्त ने नगर निगम द्वारा प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे खारिज कर दिया था।
लोकायुक्त की फटकार: रिपोर्ट ‘तथ्यहीन और अस्पष्ट’
ताज़ा जानकारी के अनुसार, जनवरी 2026 में नगर निगम प्रशासन ने इस मामले पर अपना प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया था। हालांकि, लोकायुक्त ने इस प्रतिवेदन को पूरी तरह तथ्यहीन और अस्पष्ट करार दिया है। लोकायुक्त कार्यालय ने माना कि निगम ने मुख्य आरोपों और तकनीकी विसंगतियों पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय मामले को घुमाने का प्रयास किया है।
निगम के पास अब कुछ ही दिनों का समय, 6 फरवरी को प्रस्तुत करना है दोबारा जवाब
लोकायुक्त ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए दोबारा जवाब पेश करने के लिए एक महीने का समय दिया था। इस समय सीमा की अवधि अब समाप्त होने की कगार पर है और निगम के पास जवाब दाखिल करने के लिए अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। यदि 6 फरवरी को भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद कर्मचारी नीरज श्रीवास्तव की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़ा है:
- गलत पदोन्नति : 2012 में ‘अकुशल श्रमिक’ के रूप में भर्ती हुए कर्मचारी को 2014 से ‘कुशल श्रमिक’ का वेतन दिया जा रहा है, जिसकी कोई आधिकारिक स्वीकृति रिकॉर्ड में नहीं है।
- डिप्लोमा विवाद : आरोप है कि कर्मचारी को 2014 में कंप्यूटर ऑपरेटर बनाया गया, जबकि उसका PGDCA डिप्लोमा 2016 में पूरा हुआ था।
- राजस्व क्षति : शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस ‘खुले संरक्षण’ के कारण निगम को 2014 से अब तक लाखों रुपये की राजस्व हानि हुई है।
लोकायुक्त की सख्ती के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निगम प्रशासन अपने नए प्रतिवेदन में क्या सफाई देता है। हालांकि निगम के अंदरखानों से खबर है कि नीरज श्रीवास्तव का प्रमोशन निरस्त करने और वेतन वसूली की कार्रवाई करने की तैयारी हो चुकी है !




