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पटवारी को गुमराह कर, निजी हो गई, सरकारी जमीन। नगर निगम ने जारी की बिल्डिंग परमिशन, नगर सरकार तक पहुंचा मामला

सो कॉल्ड आर्किटेक्ट और निगम अफसरों की जुगलबंदी से अधर में लटकी करोड़ों की शासकीय भूमि

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। नगर निगम के जादूगर अफसरों, संदिग्ध आर्किटेक्ट और माफिया ने ऐसा तालमेल बैठाया कि करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन को, निजी भूमि बना दिया। इस खेल के लिए एक पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किया गया और दूसरे पटवारी को गलत मौका दिखाकर भवन अनुज्ञा की फाइल पर, मनमानी रिपोर्ट लगवा ली गई। नोटशीट पर टीप लगाने वाले निगम पटवारी और क्षेत्र के पार्षद के बयान से निगम की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगा है। पढ़ें पूरी खबर… 

समझें पूरा मामला और घोटाले का अनोखा तरीका

थाटीपुर, (वार्ड -28) ग्राम मेहरा के शासकीय सर्वे नंबर 308 की भूमि पर माफिया की नजर पड़ी। एक संदिग्ध आर्किटेक्ट की मदद से, पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर कर, नजरी नक्शा सहित कुछ दस्तावेज तैयार किए गए जिनमें सरकारी सर्वे नंबर 308 की भूमि को, निजी सर्वे नंबर 307 का भाग बताया गया। नगर निगम जोन 11 के तत्कालीन ZO और अन्य ने सांठ-गांठ के चलते, इन्हीं फर्जी दस्तावेजों को आंख बंद कर फाइल में संलग्न किया और नवंबर 2024 में बैकुंठी बाई, हेमंत और वीरेंद्र सिंह आदि के नाम से भवन निर्माण मंजूरी जारी कर दी।

देखें फर्जी नजरी नक्शा और समझें इसकी कहानी..

पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर कर बनाया गया नजरी नक्शा

पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए खबर में दिखाए गए इस नजरी नक्शे का उपयोग किया गया। इसमें पटवारी पंकज भार्गव के फर्जी हस्ताक्षर किए। इस फर्जी कागज के जरिए यह साबित करने की कोशिश की गई कि ‘यह निजी भूमि है’। अब इस दस्तावेज का कहीं कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि पटवारी भार्गव आज नगर निगम मुख्यालय में ही पदस्थ हैं। निगम अफसरों को पूरे घोटाले की जानकारी होने के बावजूद आज तक मामले पर पर्दा डालने की कोशिश जारी है।

असली आर्किटेक्ट ने की शिकायतें, कहा “मामले की हो जांच”

फर्जी कागजों के आधार पर बिल्डिंग परमिशन का आवेदन करते समय जिस आर्किटेक्ट के कंसोल का उपयोग किया गया। वही आर्किटेक्ट राघवेंद्र कुशवाह ने 16 जनवरी 2025 और 17 जनवरी को नगर निगम में लिखित शिकायत देते हुए जिक्र किया कि यह परमिशन उसके द्वारा अप्लाई नहीं करवाई गई। आर्किटेक्ट राघवेंद्र कुशवाह ने स्पष्ट किया कि उसके कंसोल का दुरुपयोग किया गया है जिसकी जांच की जाए। शिकायत में आर्किटेक्ट कुशवाह ने सीपी बंसल नाम के व्यक्ति का जिक्र किया है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति स्वयं को आर्किटेक्ट बताता है और इस घोटाले का मास्टरमाइंड है।

पटवारी रिपोर्ट की दुहाई देकर, सभी को गुमराह करते रहे अफसर।  PIN ने पकड़ा बड़ा झोल

घोटाले की निर्माण मंजूरी के बारे में जब भी अफसरों से बात की गई तब तकरीबन सभी इसी बात की दुहाई देते रहे कि ‘निगम के पटवारी द्वारा नोटशीट पर अंकित की गई टीप के अनुसार विवादित भूमि सरकारी नहीं है’। खबर है कि निगमायुक्त को भी इसी तरह अंधेरे में रखा गया। PIN संवाददाता ने निगम पटवारी से यह पूछा कि “जब निगम की अपील समिति ने स्थगन दे दिया है तो आपने किस भूमि को देखकर रिपोर्ट लगाई थी?” इस सवाल पर निगम पटवारी अनूप परमार के बयान के बाद, पूरा महकमा सवालों के घेरे में आ गया है। पटवारी का कहना है कि:

मौके पर जिस जमीन पर भवन निर्माण किया जा रहा है। वह जमीन मुझे दिखाई ही नहीं गई थी। निर्माण मुख्य मार्ग पर हो रहा है और मुझे रोड से अंदर की जमीन दिखाई गई थी। तत्कालीन क्षेत्राधिकारी द्वारा, मुझे कोई अन्य जमीन दिखाकर, नोटशीट पर टीप ली गई।

अनूप परमार, पटवारी, पूर्व विधानसभा, नगर निगम, ग्वालियर

 

नगर निगम की अपील समिति में पहुंचा मामला सामने आया पार्षद का बयान

जालसाजी के तहत, सरकारी जमीन पर अवैध भवन निर्माण किया जा रहा था। हमारे द्वारा अपील समिति में शिकायत की गई। समिति ने जांच पूरी होने या आगामी आदेश तक, अवैध निर्माण पर “स्थगन” का आदेश जारी किया है।

गायत्री सुधीर मंडेलिया, पार्षद वार्ड 28, न.नि. ग्वालियर


निष्कर्ष- भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” के दावों पर सवालिया निशान ❓️

मामले के पूरे तार और सूत्रधार सामने आने के बाद भी, निगम प्रशासन द्वारा अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई और ना ही मंजूरी को निरस्त किया गया। नजरी नक्शे में शासकीय भूमि को निजी दिखाना और निगम पटवारी को कोई और भूमि दिखाकर रिपोर्ट हासिल करना…। पूरी जालसाजी से स्पष्ट होता है कि सरकारी जमीन को हड़पने की तकरीबन फुलप्रूफ प्लानिंग की गई थी। मामले में दोषियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाना चाहिए था। लेकिन मामले को दबाना और भ्रष्टाचारियों को खुली छूट देना.. निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है ?

आगामी- संपत्तिकर की फर्जीआईडी घोटाले की कड़ी में सामने आए और मामले… पूर्व विधानसभा क्षेत्र में,  मंदिर की जमीन को लगाया ठिकाने…

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