कलेक्टर का सख्त एक्शन: सीएम हेल्पलाइन में लापरवाही पर 14 अफसरों को नोटिस, वेतन काटने के भी निर्देश
शिकायतें अनसुनी करना और गोलमोल जवाब देना पड़ा भारी; जोनल ऑफिसर, तहसीलदार और बैंक मैनेजर सहित कई बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज।

ग्वालियर | 28 जनवरी 2026 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) को लेकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जन शिकायतों के निराकरण में रुचि न लेने और पोर्टल पर दर्ज समस्याओं का संतोषजनक जवाब न देने पर कलेक्टर ने जिले के 14 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। साथ ही, इनके वेतन काटने के आदेश भी दिए गए हैं।
दो श्रेणियों में हुई कार्रवाई
कलेक्टर ने अधिकारियों की लापरवाही को दो श्रेणियों में बांटते हुए कार्रवाई की है:
1. संतोषजनक जवाब न देने वाले (10 अधिकारी):
पोर्टल पर आई शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिपूर्ण निराकरण न करने पर इन अधिकारियों को नोटिस थमाया गया है:
- रवि गोडिया (जोनल अधिकारी, नगर निगम)
- डॉ. साकेत सक्सैना (BMO, घाटीगांव)
- कुमार अभिषेक खरे (सहायक आयुक्त, वाणिज्यिक कर)
- सुखदेव शर्मा (परिक्षेत्र अधिकारी, वन विभाग)
- श्रीमती मधुलिका तोमर (तहसीलदार, मुरार)
- धीरज परिहार (नायब तहसीलदार, देवरीकलां)
- शिवदयाल शर्मा (नायब तहसीलदार, सांखनी)
- आलोक वर्मा (जिला नोडल अधिकारी, कृषि मंडी)
- अशोक शर्मा (जिला पंजीयक)
- राजेंद्र कुमार शर्मा (सहायक आयुक्त, अनुसूचित जाति कल्याण)
2. शिकायतों को अटेंड न करने वाले (4 अधिकारी):
जिन्होंने पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को देखा तक नहीं, उन्हें सीधे तौर पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है:
- नितिन कुमार छीपा (कार्यपालन यंत्री, ऊर्जा विभाग, डबरा)
- देवेंद्र पाल सिंह (रीजनल मैनेजर, HDFC बैंक)
- महेश कुमार (तहसीलदार, लश्कर)
- राजेन्द्र तिवारी (संपदा अधिकारी, गृह निर्माण मंडल)
कलेक्टर की दो टूक : लापरवाही बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर ने सख्त लहजे में अफसरों को आगाह किया है कि सीएम हेल्पलाइन शासन की प्राथमिकता में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में शिकायतों के निराकरण में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों को कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर नोटिस का जवाब देना होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि शासन के दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन करते हुए शिकायतों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाए।




