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अफसरों की मेहरबानी या अंधेरगर्दी❓️ रसूखदारों के ‘मेगा होर्डिंग्स’ के आगे नतमस्तक निगम अफसर।

छोटे बैनर हटाकर पीठ थपथपा रही होर्डिंग शाखा, कार्रवाई के नाम पर SCAM❗️

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर : शहर में धड़ल्ले से बिना मंजूरी अवैध होर्डिंग और बैनर लगाए जा रहे हैं जिससे निगम के खजाने को भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन निगम की होर्डिंग शाखा के जिम्मेदार छोटे-मोटे कटआउट हटाकर कार्रवाई का दिखावा करने में लगे हैं।

बड़े स्तर के, अवैध विज्ञापनों को होर्डिंग शाखा के अफसरों का अभयदान ! देखें तीन उदाहरण :

1- गोले के मंदिर क्षेत्र में इंद्रप्रस्थ गार्डन के पास खड़ा यह विशालकाय और प्रश्नाधीन होर्डिंग। इस होर्डिंग की एक साइड की मंजूरी है जबकि यहां दोनों तरफ विज्ञापन किया जा रहा है। महीनों से इस स्ट्रक्चर पर, एक साइड अवैध विज्ञापन करके नगर निगम के राजस्व को भारी धनराशि का चूना लगाया जा रहा है। इसके अलावा ऊपर दर्शाए गए इस स्ट्रक्चर की मंजूरी भी सवालों के घेरे में है।

 

2- बिना मंजूरी के यह विज्ञापन, पड़ाव क्षेत्र में खुलेआम लगा है। यह विज्ञापन तकरीबन 6 महीनों से अवैध रूप से लगा निगम अफसरों की कार्य प्रणाली को मुंह चिढ़ा रहा है।

 

3- थाटीपुर के कोचिंग संचालक द्वारा खुलेआम किया जा रहा है यह अवैध विज्ञापन आज तक निगम अफसरों को नहीं दिखाई दिया।

बता दें कि यह तीन मामले सिर्फ उदाहरण हैं। शहर में ऐसे मामलों की भरमार है।


SCAM के तौर पर सामने आईं होर्डिंग शाखा की कार्रवाई

23 जनवरी को निपटे कार्यक्रम, 24 को कबाङ हटाकर, दर्शाई “अवैध पर कार्रवाई “

बीते दिनों नगर निगम की होर्डिंग शाखा ने अवैध विज्ञापनों के खिलाफ अभियान के तौर पर, कई कार्रवाई दिखाईं। इनमें से बीते शनिवार 24 जनवरी को की गई कार्रवाई की बात करें, तो होर्डिंग शाखा के द्वारा वह कट आउट और बैनर हटाए गए जिनका उपयोग पहले ही खत्म हो चुका था। इनमें से कुछ विज्ञापन मकर संक्रांति के थे और कुछ 23 जनवरी के आयोजनों के थे। इन छोटे-मोटे कट आउट को 24 जनवरी को हटाया गया और होर्डिंग शाखा के अफसरों ने कमिश्नर की नजर में चमकने की कोशिश की।


होर्डिंग शाखा के दिखावटी “अभियान” से डूबता राजस्व, उपजते सवाल :

  • खबर में दिखाए गए यह विशालकाय अवैध विज्ञापन, होर्डिंग शाखा के अफसरों को क्यों दिखाई नहीं दिए ?
  • इन अवैध विज्ञापनों पर समय रहते कार्रवाई करके मिल सकने वाला राजस्व, आखिर किसकी जेब में जा रहा है ?
  • 14 जनवरी और 23 जनवरी के आयोजनों के विज्ञापनों पर, 24 जनवरी को कार्रवाई का ड्रामा क्यों किया गया, जबकि उनकी उपयोगिता खत्म हो चुकी थी ?
  • अगर वह अवैध थे तो उन्हें समय रहते क्यों नहीं हटाया गया?
  • आज भी शहर में गांधी रोड पर आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के अवैध कटआउट, खंबों पर, लगे हैं क्या उन्हें उपयोगिता खत्म होने से पहले हटाया जाएगा ?

अब राजस्व कर संग्रहकों को सौंपा गया जिम्मा

नगर निगम में हुई मीटिंग में अफसर नहीं है फैसला लिया है कि अब क्षेत्र के रेवेन्यू टीसी अपने-अपने क्षेत्र में अवैध विज्ञापनों पर नजर रखेंगें और अवैध विज्ञापन करने वालों के विरुद्ध नोटिस जारी करेंगे। इसके साथ ही निर्देशित किया गया है कि नगर निगम की होर्डिंग शाखा द्वारा राजस्व कर संग्रहकों को आउटडोर मीडिया डिवाइस (OMD) की सूची उपलब्ध कराई जाएगी।

कहीं अनजान बनते अफसर, कहीं “नो रिस्पॉन्ड”

शहर में अवैध विज्ञापन की जानकारी कई बार होर्डिंग शाखा के जिम्मेदार अफसरों को विभिन्न माध्यमों से दी गई लेकिन अफसर अनजान बनते रहे। इसके अलावा होर्डिंग शाखा के वर्तमान अफसर रजनीश देवेश को मामले की जानकारी के लिए कॉल किया गया पर कॉल रिसीव नहीं किया गया।


आगे देखिए- –सिलेक्टिव OMD में संलग्न शपथ-पत्रों को लगातार छुपाया जा रहा.. सवाल है, क्यों…?

-स्ट्रक्चरों के मेंटेनेंस और देख-रेख आदेश का क्या हुआ…?

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