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सीसी रोड निर्माण में धांधली की खुली पोल; 3 अफसरों को नोटिस, पर ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों?

क्या इसी भ्रष्टाचार के लिए, पब्लिक से होती है, अरबों रुपए की टैक्स वसूली ?

ग्वालियर | शहर के विकास के नाम पर जनता की जेब से हर साल अरबों रुपए का टैक्स वसूला जाता है, लेकिन धरातल पर यह पैसा विकास की जगह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। 

नगर निगम के वार्ड क्रमांक 60 (दुष्यंत नगर) में सीसी रोड निर्माण में चल रही भयंकर धांधली ने निगम के दावों की पोल खोल दी है। मामले में आयुक्त ने तीन अधिकारियों को नोटिस तो जारी किया है, लेकिन निगम की इस कार्रवाई ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है—आखिर भ्रष्टाचार करने वाले ठेकेदार का नाम क्यों छुपाया जा रहा है?

भ्रष्टाचार का VIDEO.. अफसरों की मंशा- सड़कें उखड़ती रहें ताकि कैश फ्लो बना रहे !

​दुष्यंत नगर (तंवर स्कूल के पास) में बन रही सड़क का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें साफ दिख रहा है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण में भारी मटेरियल की चोरी की जा रही है। मानकों को ताक पर रखकर, सिर्फ आधा इंच मोटी, मटेरियल की लेयर बिछाई जा रही है। यह सड़क चंद महीनों में उखड़ जाएगी। जाहिर है अफसर चाहते भी यही हैं कि ‘काम निकलता रहे और कैश फ्लो बना रहे’।

स्थानीय निवासियों ने दिए वीडियो साक्ष्य, आयुक्त संघ प्रिय ने इन अधिकारियों को थमाए कारण बताओ नोटिस:

  • रजनीश देवेश (प्रभारी कार्यपालन यंत्री)
  • ​यशवंत मैकले (प्रभारी सहायक यंत्री, क्षेत्र 14)
  •  तनुजा वर्मा (क्षेत्राधिकारी, क्षेत्र 14)

निगम की नीयत पर सवाल: ‘मछलियों’ पर वार, ‘मगरमच्छ’ को बचा लिया?

हैरानी की बात यह है कि नगर निगम ने अफसरों के नाम तो सार्वजनिक कर दिए, लेकिन अपनी पूरी कार्रवाई में उस भ्रष्ट ठेकेदार (निविदाकार) का नाम छुपा लिया, जो मटेरियल में धांधली कर जनता के पैसे की चोरी कर रहा था। उसका नाम उजागर करने और उसे ब्लैकलिस्ट करने से परहेज क्यों किया जा रहा है? जबकि अधिकारियों के साथ-साथ, मटेरियल चोरी करने वाले ठेकेदार को भी नोटिस जारी किया जाना चाहिए था !

जनता का आक्रोश: टैक्स के पैसे की बंदरबांट कब तक?

​शहर की जनता सोशल मीडिया पर सवाल उठा रही है कि “क्या हम इसीलिए अरबों का टैक्स भरते हैं कि अधिकारी दफ्तरों में चैन की नींद सोएं और ठेकेदार हमारी मेहनत की कमाई पर भ्रष्टाचार की मलाई खाएं?” बिना अधिकारियों की साठगांठ के इतनी बड़ी धांधली मुमकिन नहीं है।

बड़ा सवाल: नोटिस जारी करना तो महज एक प्रक्रिया है, लेकिन क्या निगम उस ‘अनाम’ ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज कराएगा या फिर कागजी लीपा-पोती कर, मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? 

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