जनता ने दिए 300 करोड़, बदले में क्या मिला..उफनते सीवर, टूटी सड़कें और धूल के गुबार?
किसी पार्षद ने राज्य सरकार पर लगाये आरोप, तो किसी ने निगम अफसरों को बताया भ्रष्ट। जनता के पैसे से साहेब के दरवाजे तक बिछ रहा "रेड कारपेट"

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। अजब विडंबना ही है कि जिस जनता की जेब से निकले टैक्स के पैसों से नगर निगम के अफसरों की भारी-भरकम सैलरी निकलती है और पार्षदों को मानदेय मिलता है। आज वही जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए इन्हीं ‘जनसेवकों’ के सामने हाथ फैलाने को मजबूर है। ग्वालियर नगर निगम ने जनता से विगत वर्षों में जलकर और प्रॉपर्टी टैक्स के नाम पर 300 करोड़ से अधिक रुपये की वसूली की है, लेकिन शहर की सूरत बदलने के बजाय हालात और बदतर हो गए हैं। आलम यह है कि जहां अधिकारी रहते हैं, वहां विकास की गंगा बह रही है, लेकिन करदाता के घरों के बाहर और रास्ते में उफनते सीवर और जर्जर सड़कें नियति बन चुकी हैं।

जनता से हर बार हुई तगड़ी वसूली
बात करें जनता से वसूले गए संपत्तिकर की तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में 92.41 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 106.34 करोड़ की वसूली शहर की जनता से की गई। इसके अलावा जलकर के रूप में वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 25 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2024- 25 में 27.23 करोड़ रुपए की वसूली हुई। रनिंग वित्तीय वर्ष 2025-26 में संपत्तिकर की वसूली का आंकड़ा 70 करोड़ के नजदीक है। मतलब शहर की जनता से, नगर निगम ने इन तीन वर्षों में 300 करोङ रुपए से अधिक का टैक्स विकास के नाम पर वसूला है।

माननीयों के लिए तत्काल रास्ते साफ, जनता के लिये बहाने क्यों ?
शहर में बीते दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आगमन हुआ था। इस मौके पर नगर निगम ने वीआईपी मूवमेंट के लिए प्रस्तावित सड़कों को दुरुस्त करने में, बिना किसी बहाने के, ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। वहीं दूसरी ओर टैक्सपेयर है जो उन्हीं धूल भरी और जर्जर सड़कों से गुजरने को मजबूर है।

जनता धूल से बेहाल, साहब के लिए ‘रेड कारपेट ‘!
जब शहर की सड़कों को सुधारने का मुद्दा जोर पकड़ता है तब फंड की कमी या टेंडर प्रक्रिया का बहाना बनाया जाता है। वहीं जब बात गांधी रोड जैसे मार्ग की होती है, जहां अधिकतर साहिबानों के बंगले बने हुए हैं, तब असल में “शहर का विकास और सुशासन” देखने को मिलता है। जहां जनता के पैसे से सौंदर्यीकरण का “रेड कारपेट” बिछा हुआ है!
पब्लिक क्यों न पूछे यह सवाल:
- क्या शहर की जनता भी इसी तरह की चमचमाती और डस्ट फ्री सड़कों की हकदार नहीं है?
- टैक्स समय से न भरने पर भारी पेनल्टी लगा दी जाती है। विकास समय से न होने पर कौन जवाबदार ?
- क्या जनता सिर्फ इसीलिए टैक्स दे रही है कि साहेबानों की गाड़ी ना डगमगाएं ? जबकि टैक्स भर रही जनता की गाड़ी के शाॅकर और कमर दोनों ही टूट रहे हैं।
भाजपा के सभापति हैं,भाजपा के पार्षद ज्यादा हैं। हमारे साथ होता है सौतेला व्यवहार- कांग्रेस पार्षद
सवाल पूछे जाने पर, वार्ड नंबर 8 से कांग्रेस पार्षद, मनोज राजपूत का कहना था कि यह मुद्दा हम परिषद में उठाएंगे, नगर सरकार चाहती है कि जनता को अच्छी सुविधा मिलें लेकिन सभापति भाजपा के हैं, पार्षद भी उनके ज्यादा हैं। इसके अलावा राज्य सरकार से मिलने वाले सहायता पैकेज और चुंगी का पैसा भी हमें नहीं दिया जाता। पार्षद ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि शहर में गृहमंत्री अमित शाह का कार्यक्रम हुआ लेकिन शहर की प्रथम नागरिक (महापौर) को आमंत्रित नहीं किया गया। इसी तरह विकास संबंधी बैठकों के विषय में इनका कहना था कि इन बैठकों में ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद भारत सिंह और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट सहित भाजपा के पार्षद ही शामिल होते हैं। कांग्रेस की महापौर और पार्षदों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। यह पक्षपात विकास में रोड़ा है। पार्षद ने अमृत योजना पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि इसमें तो हमने काम नहीं किया, इस योजना के तहत अरबो रुपए का गवन हुआ, भ्रष्टाचार सबके सामने है।
निगम अधिकारी और ठेकेदार अपनी जेबें में भरने में लगे हैं
निगम अधिकारी अपनी मोनोपोली चलाते हैं। इनके ठेकेदार फिक्स हैं और उनसे आने वाला कमीशन फिक्स है। कांग्रेस पार्षदों के आरोप झूठे हैं। महापौर और सभापति सबको बराबर फंड मिलता है। निगम के अधिकारी डिपार्टमेंट को खोखला करने का काम कर रहे हैं। अमृत योजना में 900 करोड़ रूपया कहां आया और कहां चला गया कुछ पता नहीं।
मोहित जाट पार्षद (बीजेपी) वार्ड 41



