ग्वालियर

हाईकोर्ट की सख्ती: अवैध निर्माण पर रिपोर्ट पेश करने, निगमायुक्त तलब

आदेश का पालन न करने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी, कमिश्नर ने शपथ-पत्र पेश करते हुए मांगी माफी  

@अंशुल मित्तल, ग्वालियर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अवैध मल्टी पर कार्रवाई न करना निगम को भारी पड़ा। कोर्ट ने नगर निगम के प्रति नाराजगी जताते हुए, निर्देश दिए कि कमिश्नर स्वयं उपस्थित होकर रिपोर्ट/जवाब पेश करें। हालांकि कोर्ट में स्वयं उपस्थित न होकर, कमिश्नर ने वकील के माध्यम से लिखित रिप्लाई प्रस्तुत किया। जिसमें हाईकोर्ट से बिना शर्त (unconditional apology) माफी मांगते हुए, जल्द ही आदेश का पालन कराए जाने की बात कही गई। रिप्लाई के साथ शपथ-पत्र भी संलग्न किया गया।

जाने पूरा मामला:

मामला नगर निगम जोन 10 वार्ड 22 के अंतर्गत थाटीपुर क्षेत्र का है। जहां राहुल शर्मा के नाम अलग-अलग भूखंडों की भवन निर्माण मंजूरियां नगर निगम द्वारा जारी की गईं। यह सभी भवन अनुज्ञा रेजिडेंशियल यानी रिहायशी उपयोग के लिए जारी की गई थीं। लेकिन यहां सभी भूखंडों को जोड़ते हुए, 25 फ्लैट की मल्टी स्टोरी (ओरिएशन टावर) और कई कमर्शियल दुकाने अवैध तरीके से बना दी गईं।

ओरिएशन टाॅवर ओरिएशन टाॅवर 

याचिकाकर्ता के मकान में आई दरारें, निगम में नहीं हुई सुनवाई, अंततः मामला पहुंचा हाईकोर्ट 

परमीशन के विरुद्ध बनी, इस बहुमंजिला इमारत को बनाने के दौरान MOS, FAR आदि का भी अतिक्रमण किया गया। बेतरतीब निर्माण के कारण पड़ोस में रहने वाली, याचिकाकर्ता राधा तोमर का मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। जिससे उनके मकान में गहरी दरारें आ गई और परिवार को जान का संकट गहरा गया। राधा तोमर ने कई लिखित शिकायतें, निगम अफसरों को दीं लेकिन शिकायतों पर निगम अफसरों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके बाद राधा तोमर ने न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट ने 20 मई 2025 को पारित आदेश में ओरिएशन टावर के निर्माण को अवैध निर्माण की श्रेणी में पाते हुए नगर निगम को निर्देशित किया कि अवैध निर्माण को हटाया जाए। इसके लिए हाईकोर्ट ने नगर निगम को चार सप्ताह का समय दिया था।

न्यायालय के आदेश का पालन न होने पर कमिश्नर को मिला था ‘कंटेंप्ट नोटिस’

समय रहते अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करते हुए नगर निगम ने ओरिएशन टावर के मालिक, राहुल शर्मा के विरुद्ध 25 अगस्त को एक नोटिस जारी करते हुए इतिश्री कर ली। जिसके बाद न्यायालय के आदेश की अवहेलना (contempt of court) के मामले में, पिटीशनर राधा तोमर की ओर से, एडवोकेट पालेंद्र सिंह दांगी ने न्यायालय में पैरवी की। 28 अगस्त 2025 को, निगमायुक्त संघ प्रिय के विरुद्ध हाईकोर्ट से अवमानना नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने कमिश्नर को निर्देशित किया था कि वे 18 दिसंबर को स्वयं उपस्थित होकर, मामले की रिपोर्ट पेश करें।

भवन शाखा को दी गई ढील, बनी मुसीबत ?

खबर में बताया गया यह मामला तो महज बानगी है। जबकि निगम की भवन शाखा में कुछ ऐसे मामले भी चर्चित हैं। जहां तथाकथित आर्किटेक्ट और भवन अधिकारी ने मिलकर, सरकारी जमीन तक की भवन निर्माण अनुज्ञा जारी कर डाली। इस तरह के संगीन मामले, लगातार सामने आने पर भी, भवन शाखा के करिंदों पर, कोई कसावट नहीं की गई। इससे साफ होता है कि भवन शाखा को विशेष छूट दी गई है। लेकिन यही “छूट” अब मुसीबत बनती भी नजर आ रही है। साफ है कि अगर भवन शाखा पर सख्ती की जाए तो शहर में अवैध निर्माण रुकेगा और नियमविरुद्ध निर्माण करने वालों से निगम को खासा राजस्व भी मिलने की संभावना है।

दोनों आयुक्तों को मिले ‘कंटेंप्ट नोटिस’, जिम्मेदार- भवन शाखा

मुरार के सीपी कॉलोनी इलाके में हुए एक अवैध निर्माण के मामले में नगर निगम के पूर्व कमिश्नर अमन वैष्णव को भी हाईकोर्ट की फटकार का सामना करना पड़ा था। अब वर्तमान कमिश्नर को हाईकोर्ट को माफीनामा देना पड़ रहा है। दोनों ही मामलों में भवन शाखा के अफसर यदि अवैध निर्माण रोक देते या समय रहते कार्रवाई करते, तो शायद निगम कमिश्नरों को लगातार हाईकोर्ट की नाराजगी का सामना नहीं करना पड़ता।

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