
भारत के इतिहास में 25 दिसंबर की तारीख केवल एक त्यौहार की नहीं, बल्कि दो ऐसे युगपुरुषों के स्मरण का दिन है जिन्होंने राष्ट्र की आत्मा को संवारा। एक ने ‘शिक्षा’ को राष्ट्र की नींव बनाया, तो दूसरे ने ‘सुशासन’ को लोकतंत्र का आधार।
पंडित मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन भारतीयता के उन मूल्यों का प्रतीक है, जहाँ सेवा ही सर्वोपरि है।
महामना मालवीय: आधुनिक भारत के ‘शिक्षक’
25 दिसंबर 1861को प्रयागराज (इलाहाबाद) में जन्मे पंडित मदन मोहन मालवीय केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक थे। उन्होंने समझा था कि गुलामी की बेड़ियाँ केवल शिक्षा से ही कट सकती हैं। इनके पिता का नाम बैजनाथ और माता का नाम भूना देवी था।

• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU): एक भिक्षापात्र लेकर उन्होंने जो संकल्प किया, वह आज एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है। यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कारों और आधुनिक विज्ञान का संगम है। सन् 1916 में एनी बेसेंट और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर मालवीय ने इसकी नींव रखी। BHU की स्थापना मालवीय जी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
• स्वतंत्रता संग्राम और राजनीति: महामना मालवीय जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख नेता थे। वे चार बार कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए (1909, 1918, 1932 और 1933)
• हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान: उन्होंने हिंदी भाषा को न्यायालयों में सम्मान दिलाने और भारतीय संस्कृति को गर्व के साथ जीने की प्रेरणा दी।
2. अटल बिहारी वाजपेयी: शब्दों के जादूगर और सुशासन के प्रणेता

25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (मध्यप्रदेश) में जन्मे अटल जी ने राजनीति को दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर ‘राष्ट्रनीति’ बनाया। वे राजनीति के “भीष्म पितामह” भी माने जाते हैं, उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके विरोधी भी उनका सम्मान करते थे।
• परमाणु शक्ति और शांति: पोखरण परीक्षण से उन्होंने दुनिया को भारत की शक्ति दिखाई, तो वहीं ‘बस यात्रा’ के जरिए शांति का संदेश भी दिया।
• विकास की नींव: स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यों से उन्होंने भारत के बुनियादी ढांचे को नई गति दी।
सुशासन दिवस: एक साझा सपना
2014 से भारत सरकार अटल जी के जन्मदिन को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाती है। वास्तव में, सुशासन (Good Governance) वह सेतु है जिस पर मालवीय जी की शिक्षा और अटल जी का राजनीतिक विजन मिलता है।
• मालवीय जी ने चरित्र निर्माण पर जोर दिया, जो सुशासन की पहली शर्त है।
• अटल जी ने पारदर्शिता और जन-कल्याण के जरिए उसे धरातल पर उतारा।
आज जब भारत ‘विकसित भारत’ बनने की ओर अग्रसर है, तब इन दोनों विभूतियों के विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
मालवीय जी ‘अतीत’ के गौरव के रक्षक थे, और अटल जी ‘भविष्य’ के भारत के निर्माता। इन दोनों भारत रत्नों का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी देशभक्ति है।
”एक ने शिक्षा की अलख जगाकर, राष्ट्र का भाग्य संवारा था,
दूजे ने सुशासन की कलम से, भारत का मान निखारा था।
महामना की तपस्या और अटल के शब्दों का वह गान,
दोनों के चरणों में सादर, नमन करता है हिंदुस्तान।”




